
खूंटी। बढ़ती गर्मी के साथ झारखंड के खूंटी में जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी पानी की समस्या गहराने लगी है। खासकर खूंटी नगर पंचायत क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है, जहां तजना नदी पर बने जलाशय (वीयर) का जलस्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंचने से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बुधवार को आंशिक जलापूर्ति के बाद गुरुवार से शहर में पानी की सप्लाई बंद हो गई, जिससे लगभग साढ़े चार हजार घर प्रभावित हुए हैं। लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई इलाकों में लोग एक-एक बाल्टी पानी के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं।
स्थिति को संभालने के लिए नगर पंचायत ने प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति शुरू की है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण पूरे शहर में समुचित वितरण करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऊंचाई वाले इलाकों में समस्या और भी गंभीर है, जहां भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। अधिकांश कुएं सूख चुके हैं और कई स्थानों पर बोरिंग भी फेल हो रही है।
उल्लेखनीय है कि खूंटी में तजना जलापूर्ति केंद्र का निर्माण 1970 के दशक में की गई थी। इसके बाद व्यवस्था को मजबूत करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन हर साल गर्मियों में जल संकट की स्थिति जस की तस बनी रहती है।
करीब सात वर्ष पहले 56 करोड़ रुपये की लागत से विश्व बैंक संपोषित शहरी जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2045 तक की आबादी को ध्यान में रखते हुए 24 घंटे जलापूर्ति सुनिश्चित करना था। 3 दिसंबर 2025 से नियमित आपूर्ति भी शुरू हुई, लेकिन योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू स्थायी जल स्रोत को नजरअंदाज कर दिया गया।
आज भी जलापूर्ति पूरी तरह तजना नदी के पुराने वीयर और इंटक वेल पर निर्भर है, जो हर साल गर्मी में सूख जाते हैं। नतीजतन, यह महत्वाकांक्षी योजना पहली ही गर्मी में विफल साबित होती नजर आ रही है।
जल संकट से स्थायी समाधान के लिए तजना नदी में नए वीयर के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। नगर पंचायत ने लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्ताव तैयार कर विभाग को भेजा था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त जल भंडारण की व्यवस्था किए बिना हर साल यही संकट दोहराया जाएगा। फिलहाल अच्छी बारिश ही एकमात्र उम्मीद मानी जा रही है। यदि समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
नगर पंचायत की प्रशासक सृष्टि दीप्रिया मिंज ने बताया कि फिलहाल टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। नगर पंचायत के पास छह डीप बोरिंग और आठ टैंकर उपलब्ध हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टैंकर भी लगाए जाएंगे।
जल संकट से निपटने के लिए सिटी मैनेजर मोनिश सलाम और विंसेंट रिचर्ड लकड़ा को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। आमजन पेयजल से जुड़ी समस्याओं के लिए उनके मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। वहीं सुपरवाइजर सुजल गुप्ता से भी सहायता ली जा सकती है।
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