
रांची। Sudivya Kumar Sonu Political Journey सिर्फ चुनावी जीत और हार की कहानी नहीं है। करीब तीन दशक तक झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े रहे सुदिव्य कुमार सोनू ने 2009 और 2014 में चुनावी हार का सामना किया, लेकिन संगठन से अपनी दूरी नहीं बनाई। 2019 में गिरिडीह से पहली बार विधायक बने और 2024 में लगातार दूसरी जीत दर्ज कर हेमंत सोरेन सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। 56 वर्ष की उम्र में उनके आकस्मिक निधन के साथ झारखंड की राजनीति ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिसने संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद सत्ता के शीर्ष स्तर तक अपनी जगह बनाई।
2009 से शुरू हुआ Sudivya Kumar Sonu Political Journey
सुदिव्य कुमार सोनू ने 2009 में गिरिडीह विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ा। इसके बाद 2014 में भी झामुमो के टिकट पर मैदान में उतरे, लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 में भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी ने गिरिडीह सीट पर जीत दर्ज की थी।
लगातार दो चुनाव हारने के बावजूद सोनू ने सक्रिय राजनीति नहीं छोड़ी। झामुमो संगठन में उनकी भूमिका लगातार बनी रही और धीरे-धीरे पार्टी के भीतर उनका प्रभाव बढ़ता गया। 2019 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक सफर का बड़ा मोड़ साबित हुआ।
2019 में पहली बार बने विधायक
2019 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को हराकर गिरिडीह सीट पर जीत दर्ज की। सोनू को 80,871 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार को 64,987 वोट मिले। इस जीत के साथ वह पहली बार विधानसभा पहुंचे।

विधायक बनने के बाद गिरिडीह में शिक्षा और आधारभूत विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता चर्चा में रही। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, सर जेसी बोस विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में उनकी पहल रही। पीरटांड़ में बड़ी सिंचाई परियोजना के साथ मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े प्रस्ताव भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहे।
संगठन से रणनीति तक बढ़ा राजनीतिक प्रभाव
सुदिव्य कुमार सोनू की पहचान सिर्फ गिरिडीह के विधायक तक सीमित नहीं रही। 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की रणनीति में भी उनकी भूमिका की चर्चा हुई। (Sudivya Kumar Sonu Political Journey) झामुमो की सोशल मीडिया टीम को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में उनके योगदान का उल्लेख विभिन्न रिपोर्टों में किया गया।
कल्पना सोरेन की चुनावी रणनीति में भी भूमिका
हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के सक्रिय राजनीति में आने के दौरान भी सुदिव्य कुमार सोनू की भूमिका चर्चा में रही। रिपोर्टों के मुताबिक, गांडेय विधानसभा क्षेत्र से कल्पना सोरेन को चुनाव लड़ाने की रणनीति में सोनू का योगदान था। (Sudivya Kumar Sonu Political Journey) कल्पना सोरेन ने गांडेय उपचुनाव में जीत दर्ज की और बाद में 2024 के विधानसभा चुनाव में भी सीट बरकरार रखी।
2024 में लगातार दूसरी जीत, फिर मिला मंत्री पद
2024 के विधानसभा चुनाव में सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह से लगातार दूसरी जीत दर्ज की। उन्हें 94,042 वोट मिले, जबकि भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी को 90,204 वोट मिले। (Sudivya Kumar Sonu Political Journey) इस जीत के बाद हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

गिरिडीह से झामुमो के टिकट पर जीतकर मंत्री बनने वाले पहले नेता
सुदिव्य कुमार सोनू के नाम गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से झामुमो के टिकट पर जीतकर मंत्री बनने का रिकॉर्ड भी जुड़ा। (Sudivya Kumar Sonu Political Journey) इससे पहले 2000 में गिरिडीह से विधायक चंद्रमोहन प्रसाद भाजपा सरकार में मंत्री बने थे। सोनू झामुमो के टिकट पर गिरिडीह से जीतकर मंत्री बनने वाले पहले नेता रहे।
कई बड़े विभागों की संभाली जिम्मेदारी
कैबिनेट मंत्री (Sudivya Kumar Sonu Political Journey) बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। इस तरह उनका राजनीतिक सफर एक क्षेत्रीय विधायक से राज्य सरकार के कई अहम विभाग संभालने वाले कैबिनेट मंत्री तक पहुंचा।
हार के बाद भी संगठन नहीं छोड़ा, यहीं से बदली कहानी
सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक यात्रा का सबसे अहम पहलू उनकी शुरुआती चुनावी असफलताएं रहीं। 2009 और 2014 की हार के बाद भी उन्होंने झामुमो संगठन में सक्रियता बनाए रखी। (Sudivya Kumar Sonu Political Journey) 2019 में पहली बार विधानसभा पहुंचे और 2024 में लगातार दूसरी जीत के साथ अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की।
Sudivya Kumar Sonu Political Journey की यही कहानी बताती है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में अपनी जगह बनाई और आखिरकार राज्य सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले कैबिनेट मंत्री बने। 56 वर्ष की उम्र में उनका आकस्मिक निधन इस राजनीतिक सफर को अचानक विराम दे गया।
इसे भी पढ़ें……………
सुदिव्य कुमार सोनू की अचानक मौत, Sudivya Kumar Sonu Death से झारखंड में शोक; हार्ट अटैक की बात


