
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में सात पहाड़ियों के बीच स्थित मालकेतु पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर विराजमान पहाड़ी वाली माई का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता रानी पूरी करती हैं। यही वजह है कि शारदीय नवरात्र के दौरान यहां छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के साथ पड़ोसी राज्य झारखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। शारदीय नवरात्र शुरू होने के साथ ही मंदिर में सुबह से शाम तक भक्तों की आवाजाही बढ़ गई है।
11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हुई है। इन नौ दिनों में देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। रामानुजगंज के पहाड़ी वाली माई मंदिर में भी नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। पहाड़ की ऊंची चोटी पर स्थित मंदिर में माता के दर्शन के लिए भक्त दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। कोई अपनी मन्नत लेकर मां के दरबार में पहुंच रहा है तो कोई पूरी हुई मुराद के लिए आभार जताने आ रहा है।
पेड़ के नीचे तस्वीर रखकर शुरू हुई थी पूजा
पहाड़ी वाली माई मंदिर का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, लेकिन कुछ ही वर्षों में इसकी पहचान दूर-दूर तक बन गई है। स्थानीय मान्यता के अनुसार रामानुजगंज निवासी अशोक गोड़ को माता ने दर्शन दिए थे। इसके बाद पहाड़ पर एक पेड़ के नीचे माता की तस्वीर स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की गई। धीरे-धीरे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी और लोगों की मदद से मंदिर का निर्माण कराया गया।
वर्ष 2014 से यहां माता की पूजा-अर्चना शुरू होने की जानकारी स्थानीय श्रद्धालु देते हैं। इसके बाद करीब 2015 में भक्तों के सहयोग से मंदिर का विकास किया गया। समय के साथ मंदिर की पहचान रामानुजगंज से बाहर भी होने लगी। अब छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
मन्नत पूरी होने पर बढ़ती गई श्रद्धालुओं की संख्या
स्थानीय भक्तों की मान्यता है कि पहाड़ी वाली माई के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है। जिन श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है, वे दोबारा माता के दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इसी आस्था के कारण मंदिर में भक्तों की संख्या लगातार बढ़ी है।
रामानुजगंज के वार्ड क्रमांक 14 निवासी शर्मीला कुशवाहा बताती हैं कि सात पहाड़ियों के बीच माता करीब वर्ष 2014 से विराजमान हैं। नवरात्र के नौ दिनों तक यहां सुबह और शाम भजन-कीर्तन किया जाता है। सामान्य दिनों में भी प्रत्येक मंगलवार को भक्त जुटते हैं। मौसम चाहे धूप का हो या बारिश का, पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहता है। उनका कहना है कि माता के दरबार में सच्चे मन से जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह पूरी होती है। श्रद्धालुओं को यहां माता की विशेष उपस्थिति का अनुभव होता है।
अष्टमी को भंडारा, नवमी को प्रसाद वितरण
मंदिर के पुजारी पवन पांडेय के अनुसार नवरात्र में श्रद्धालुओं द्वारा अखंड दीप प्रज्वलित किया जाता है। नौ दिनों तक माता की विशेष पूजा-अर्चना होती है। नवरात्र की अष्टमी को भंडारे का आयोजन किया जाता है, जबकि नवमी को श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया जाता है। इन दिनों सुबह से शाम तक भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, उत्तरप्रदेश और बिहार से भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
296 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं भक्त
पहाड़ी की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। पुजारी पवन पांडेय के मुताबिक पहाड़ी पर पैदल चढ़ने के लिए कुल 296 सीढ़ियां बनाई गई हैं। इसके अलावा करीब आधा किलोमीटर लंबी सीसी सड़क भी तैयार की गई है, जिससे कार से भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इससे बुजुर्गों और ऐसे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती है, जिन्हें सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती है।
सात पहाड़ियों के बीच ऊंची चोटी पर स्थित यह मंदिर अब रामानुजगंज की धार्मिक पहचान बनता जा रहा है। नवरात्र के दौरान यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि कम समय में ही पहाड़ी वाली माई के दरबार से छत्तीसगढ़ के साथ पड़ोसी राज्यों के लोगों की आस्था जुड़ गई है।
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