
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में जीवनदायिनी कन्हर नदी इस बार अप्रैल माह में ही लगभग सूखने के कगार पर पहुंच गई है। हालांकि नदी के एनीकट में थोड़ी बहुत जलराशि मौजूद है, लेकिन वह भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में नगर की करीब 20 हजार की आबादी के लिए नगरपालिका को नदी के बीच दो जगह जेसीबी से गड्ढा खोदकर “सीना चीरकर” पानी निकालना पड़ रहा है, ताकि पेयजल आपूर्ति बनी रहे।
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज की कन्हर नदी, जो नगर समेत आसपास के पशु-पक्षियों और झारखंड सीमा के इलाकों के लिए भी जीवनरेखा मानी जाती है, इस बार भीषण गर्मी की शुरुआत में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। अप्रैल माह में ही नदी का जलस्तर तेजी से नीचे चला गया है, जिससे हालात गंभीर हो गए हैं।
नगरपालिका द्वारा स्थिति को संभालने के लिए नदी के भीतर दो स्थानों पर जेसीबी मशीन से गड्ढे खोदकर पानी निकाला जा रहा है। इसी पानी से फिलहाल नगर की पेयजल आपूर्ति की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, एनीकट में थोड़ा पानी जरूर बचा है, लेकिन वह लंबे समय के लिए पर्याप्त नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी गर्मी का शुरुआती दौर है और आने वाले ढाई महीने सबसे कठिन रहने वाले हैं। मौसम विभाग भी भीषण गर्मी की चेतावनी दे चुका है, जिससे जल संकट और गहराने की आशंका है। पिछले वर्ष इसी अवधि में बारिश के चलते कन्हर नदी लबालब थी और लोगों को पानी की कोई परेशानी नहीं हुई थी, लेकिन इस बार हालात पूरी तरह विपरीत हैं।

रामानुजगंज नगरपालिका के सीएमओ सुधीर कुमार ने बताया कि कन्हर नदी से वर्तमान में दो स्थानों पर पानी निकाला जा रहा है। एक ओर पुराने कुएं की साफ-सफाई कर उसे पुनः उपयोग में लाया गया है, जबकि दूसरी ओर जेसीबी के माध्यम से गड्ढा खोदकर पानी निकाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि, इन्हीं दोनों स्रोतों से नगर के सभी वार्डों में नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। साथ ही लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि भविष्य में भी पेयजल आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा न आए।
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