बलरामपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमवार को बलरामपुर के हाई स्कूल मैदान में जिला स्तरीय राज्योत्सव का आयोजन किया गया। ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ की थीम पर आयोजित इस समारोह में विकास योजनाओं की प्रदर्शनी, हितग्राहियों को सहायता वितरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जिले की विकास यात्रा और लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था। तब से हर वर्ष एक नवंबर को राज्योत्सव मनाया जाता है। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि राज्योत्सव में जनप्रतिनिधियों के साथ कलाकार और आम नागरिक भी शामिल होते हैं। जिस तरह उत्सव मनाया जाता है, उसी उत्साह के साथ प्रदेशवासी राज्योत्सव मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रदेश की उपलब्धियों, संस्कृति और विकास यात्रा को साझा करने का अवसर है।
सांसद चिंतामणि महाराज ने अपने संबोधन में ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ की थीम का उल्लेख करते हुए कहा कि बेटियों को बड़े सपने देखने चाहिए और युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय रोजगार देने वाला बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन योजना, धरती आबा अभियान और पीएम-जनमन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से महिलाओं और आदिवासी परिवारों तक लाभ पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी अपील की कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।
कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन में जिले में महिला स्व-सहायता समूहों की भूमिका का उल्लेख करते हुए बताया कि 10 हजार से अधिक समूहों से करीब 1 लाख 15 हजार परिवार जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि प्रिज्मा एआई के साथ हुए समझौते के बाद बलरामपुर प्रदेश का पहला जिला बना है, जहां एआई डेटा एनोटेशन सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इसके माध्यम से स्थानीय महिलाओं और युवाओं को अपने जिले में रहकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े काम सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने मिशन आचार्य, बालभोग योजना, चांगरो के जैविक जीराफूल चावल की ब्रांडिंग और जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे पांच प्रतिशत मॉडल की जानकारी भी दी। बालभोग के तहत शंकरगढ़ विकासखंड के 967 बच्चों को प्रतिदिन रागी और मिलेट्स से बने पौष्टिक लड्डू दिए जा रहे हैं।
राज्योत्सव में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री और सहायता राशि वितरित की गई। समाज कल्याण विभाग की ओर से पूजा मंडल, आर्यन रवि और अनिकेत तिर्की को व्हीलचेयर प्रदान की गई। दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत प्रमोद कोड़ाकू को 50 हजार रुपये और दिव्यांगजन उच्च शिक्षा प्रोत्साहन के तहत महेंद्र कांसी को 6 हजार रुपये का चेक दिया गया। वन विभाग ने हाथी से जनहानि के प्रकरण में 6 लाख रुपये तथा मकान क्षति के प्रकरण में 25 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की। वहीं स्वामित्व योजना के तहत ग्राम भनौरा के हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख वितरित किए गए।
कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए विभागीय स्टॉलों के माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं और जिले में हो रहे विकास कार्यों की जानकारी दी गई। यातायात विभाग और साइबर सेल की प्रदर्शनी के जरिए भी लोगों को जागरूक किया गया। रक्षित निरीक्षक विमलेश देवांगन ने बताया कि यातायात विभाग और साइबर सेल ने संयुक्त रूप से स्टॉल लगाया है। यहां लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के साथ नाबालिगों के वाहन चलाने से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि नाबालिगों के वाहन चलाने पर उनके अभिभावकों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें तीन वर्ष तक की सजा और 25 हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। साइबर सेल के स्टॉल पर फर्जी लिंक के जरिए होने वाली ठगी, बैंक खातों से रकम निकालने और ऑनलाइन फ्रॉड के अलग-अलग तरीकों के बारे में बताया जा रहा है, ताकि लोग ऐसे अपराधों से सतर्क रह सकें।
राज्योत्सव की सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय कलाकारों और विद्यार्थियों के साथ बाहर से आए कलाकारों ने भी प्रस्तुतियां दीं। छत्तीसगढ़ी स्वागत नृत्य, सुवा नृत्य, शिव तांडव, कान्हा नृत्य और सूफी नृत्य के साथ घूमर, हरियाणवी, अरुणाचली और नेपाली लोकनृत्यों ने मंच पर विविध रंग बिखेरे। भेलवाडीह के पहाड़ी कोरवा कलाकारों की उड़िया लोकनृत्य प्रस्तुति और नारी सशक्तिकरण पर आधारित कार्यक्रम को दर्शकों ने खूब सराहा। कसडोल के लोक मंथन दल ने जनजातीय नृत्य के माध्यम से वनांचल की परंपरा को जीवंत किया, जबकि बिलासपुर की वाइब्रेशन डांस एकेडमी ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां दीं।
सांस्कृतिक संध्या का विशेष आकर्षण बनारस का अक्षत कलेक्टिव रहा। समूह ने शिव स्तुति से प्रस्तुति की शुरुआत की। तबले की थाप और बांसुरी की मधुर धुन के साथ भक्ति संगीत ने माहौल को सुरमय बना दिया। इसके बाद समूह ने उप-शास्त्रीय और सुगम गायन की प्रस्तुतियों से दर्शकों को देर तक बांधे रखा। बनारस की सांगीतिक परंपरा, कसडोल की जनजातीय संस्कृति, बिलासपुर के कलाकारों की प्रस्तुतियों और स्थानीय प्रतिभाओं के संगम ने राज्योत्सव को यादगार बना दिया।
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