
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज शहर की पहचान केवल कन्हर नदी, मंदिरों और सीमावर्ती बाजार से नहीं है। शहर के भीतर आज भी ऐसी कई ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं, जो इसके पुराने इतिहास की कहानी कहती हैं। इन्हीं में से एक है थाना रोड में 1934 में बनाया गया पुराना अस्पताल भवन। करीब 92 वर्ष पुरानी यह इमारत आज भी मजबूती से खड़ी है। हालांकि रखरखाव के अभाव में अब इसके कई हिस्सों में मरम्मत की जरूरत है।
रामानुजगंज को बसाने का श्रेय तत्कालीन सरगुजा स्टेट के महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव को दिया जाता है। बताया जाता है कि पहले यह क्षेत्र बोहला के नाम से जाना जाता था। महाराजा ने यहां लोगों को बसाया, बाजार विकसित कराया और उनके नाम पर यह शहर रामानुजगंज कहलाया। आजादी से 13 वर्ष पहले वर्ष 1934 में उन्होंने यहां अस्पताल का निर्माण कराया था।
अस्पताल की इमारत का डिजाइन पंडित चंद्र शेखर शर्मा, सीई, स्टेट इंजीनियर, सरगुजा स्टेट ने तैयार किया था। इसका निर्माण मैसर्स हीरालाल एंड ब्रदर्स, इंजीनियर, बिल्डर्स एंड स्टेट कॉन्ट्रैक्टर्स, सरगुजा स्टेट ने किया था। करीब 92 वर्ष बाद भी यह भवन अपने मूल स्वरूप में मौजूद है। वर्तमान में इसी भवन में किशोर न्यायालय संचालित किया जा रहा है।
बारिश में छत से टपकता है पानी
पुरानी इमारत आज भी मजबूत है, लेकिन समय के साथ इसमें रखरखाव की जरूरत बढ़ गई है। बारिश के मौसम में भवन की छत से कई जगह पानी टपकता है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और संरक्षण किया जाए तो यह ऐतिहासिक इमारत आने वाले लंबे समय तक उपयोग में लाई जा सकती है।
नगर के वयोवृद्ध निवासी सुभाष जायसवाल बताते हैं कि जब रामानुजगंज में आधुनिक सुविधाएं नहीं थीं, तब यहां अस्पताल हुआ करता था। उनके अनुसार महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव ने वर्ष 1934 में अस्पताल बनवाया था। अस्पताल में अच्छे डॉक्टर सेवा देते थे और मरीजों के रहने की भी व्यवस्था थी। उनके मुताबिक आजादी से पहले ही रामानुजगंज को अस्पताल जैसी सुविधा मिलना उस समय के लिए बड़ी बात थी।
सुभाष जायसवाल बताते हैं कि अस्पताल के सामने महारानी बृजेश्वरी हाई स्कूल था। उन्होंने इसी स्कूल में दूसरी कक्षा से मैट्रिक तक पढ़ाई की। उनके अनुसार उस समय रामानुजगंज थाना, अस्पताल और स्कूल इसी क्षेत्र में प्रमुख इमारतें थीं। आज पुराने स्कूल भवन की जगह नया स्कूल बन चुका है, लेकिन अस्पताल की पुरानी इमारत अब भी मौजूद है।
मंदिरों से भी जुड़ा है इतिहास
सुभाष जायसवाल के अनुसार महाराजा रामानुज शरण सिंहदेव धार्मिक प्रवृत्ति के थे। उन्होंने रामानुजगंज में मां महामाया मंदिर और राम मंदिर की स्थापना भी कराई थी। दोनों मंदिर कन्हर नदी के तट के पास आज भी लोगों की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इस तरह अस्पताल के साथ शहर के मंदिर और अन्य पुरानी इमारतें रामानुजगंज के शुरुआती इतिहास से जुड़ी हुई हैं।
निर्माण करने वाले परिवार की भी अपनी कहानी
पुराने अस्पताल के निर्माण से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण जानकारी चौधरी हीरालाल के परिवार से सामने आती है। चौधरी हीरालाल के छोटे भाई के पोते दिनेश गुप्ता बताते हैं कि पुराने अस्पताल का निर्माण उनके दादाजी की फर्म हीरालाल एंड ब्रदर्स ने कराया था। उनके अनुसार रामानुजगंज का पुराना थाना भवन भी इसी फर्म ने बनाया था और दोनों इमारतों का निर्माण करीब 1934 के आसपास हुआ था।
दिनेश गुप्ता के अनुसार उनके दादाजी चौधरी हीरालाल सरगुजा स्टेट के स्टेट कॉन्ट्रैक्टर थे। परिवार में चार भाई थे। सबसे बड़े चौधरी हीरालाल, दूसरे चौधरी जवाहरलाल, तीसरे मोतीलाल और सबसे छोटे चौधरी मोहरलाल थे। मोतीलाल सरगुजा स्टेट के खजांची और चौधरी मोहरलाल स्टेट के तहसीलदार थे।
आज जब कई नई इमारतें निर्माण के कुछ वर्षों में ही मरम्मत मांगने लगती हैं, तब करीब 92 वर्ष पुरानी यह इमारत अपने आप में पुराने समय की निर्माण तकनीक और मजबूती का उदाहरण है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन इस भवन को केवल एक सरकारी इमारत के रूप में न देखे, बल्कि रामानुजगंज के इतिहास से जुड़ी धरोहर के रूप में इसका संरक्षण करे। समय पर मरम्मत और उचित रखरखाव से इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
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