
रांची। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। उसे साहिबगंज से धनबाद जेल ले जाया जा रहा था। इसी दौरान जामताड़ा जिले में पुलिस और सुजीत के बीच फायरिंग हुई। पुलिस के मुताबिक, सुजीत ने सुरक्षा में तैनात जवान का हथियार छीन लिया और वहां से भागने की कोशिश करते हुए गोली चला दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। घटना की जांच शुरू कर दी गई है।
घटना जामताड़ा थाना क्षेत्र में साहिबगंज-गोविंदपुर हाईवे पर सुपाईडीह और केंदबोना के बीच हुई। बताया जा रहा है कि पुलिस का काफिला सुजीत को धनबाद जेल लेकर जा रहा था। रास्ते में शंभू लाइन होटल के आसपास पुलिस वाहन में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे दूसरे वाहन में शिफ्ट करने की तैयारी चल रही थी।
इसी दौरान सुजीत ने पुलिसकर्मियों से टॉयलेट जाने की बात कही। पुलिस के अनुसार, उसे वाहन से बाहर निकाला गया। इसी मौके का फायदा उठाकर उसने एक पुलिसकर्मी का हथियार अपने कब्जे में ले लिया और फायरिंग करते हुए भागने लगा। स्थिति बिगड़ते देख पुलिसकर्मियों ने तत्काल मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग की।
मुठभेड़ के बाद सुजीत का शव कैदी वाहन से कुछ दूरी पर मिला। वह काले रंग की टी-शर्ट और सफेद पैंट पहने हुए था। उसके हाथ में हथकड़ी लगी होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, उसके शरीर पर तीन गोलियों के निशान मिले हैं। हालांकि, मौत और गोली लगने की पूरी स्थिति पोस्टमार्टम तथा जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
घटनास्थल पर पहुंची FSL टीम
मुठभेड़ के बाद मामले की जांच तेज कर दी गई। रांची से फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम घटनास्थल पर पहुंची और वहां बारीकी से जांच की। टीम ने घटनास्थल से संबंधित साक्ष्यों को जुटाया और फायरिंग की परिस्थितियों को समझने के लिए जरूरी जांच की।

फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जामताड़ा अस्पताल भेजा गया। पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। मामले में पुलिस की कार्रवाई और मुठभेड़ की परिस्थितियों की जांच जारी है।
लंबे समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय था सुजीत
सुजीत सिन्हा का नाम झारखंड के चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आता रहा है। उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसका प्रभाव खास तौर पर पलामू और आसपास के क्षेत्रों में रहा था। रंगदारी और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में उसका नाम लगातार सामने आता रहा।
वर्ष 2016 के आसपास उसके गिरोह की गतिविधियां काफी चर्चा में थीं। पुलिस की कार्रवाई बढ़ने के बाद उसके ओडिशा भाग जाने की बात सामने आई थी। बाद में उसे गिरफ्तार किया गया और तब से वह अलग-अलग जेलों में बंद रहा।
पुलिस के अनुसार, साहिबगंज से धनबाद जेल भेजा जाना उसकी जेल शिफ्टिंग की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा था। सुरक्षा को लेकर हर बार विशेष इंतजाम किए जाते थे। इस बार भी उसे पुलिस सुरक्षा में एक जेल से दूसरी जेल ले जाया जा रहा था, लेकिन जामताड़ा में हुई घटना के बाद उसकी मौत हो गई।
जेल में रहते हुए भी गिरोह पर प्रभाव का आरोप
पुलिस रिकॉर्ड और पूर्व में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, जेल में रहने के दौरान भी सुजीत के आपराधिक नेटवर्क के सक्रिय रहने की बात सामने आती रही थी। उसके गिरोह से जुड़े लोगों पर रंगदारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, उसकी करीबी महिला सहयोगी प्रियंका पर गिरोह के आर्थिक और अन्य कामों में भूमिका निभाने के आरोप लगे थे। बाद में उसकी पत्नी रिया सिन्हा का नाम भी गिरोह से जुड़ी गतिविधियों के संदर्भ में सामने आया। इन मामलों में पुलिस की जांच और कार्रवाई अलग-अलग स्तर पर चलती रही है।
मुठभेड़ की परिस्थितियों की जांच जारी
सुजीत सिन्हा की मौत के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण जांच इस बात की होगी कि जेल शिफ्टिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे हथियार तक कैसे पहुंच मिली और घटनास्थल पर फायरिंग की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। FSL जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आधिकारिक जांच से घटना की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि आरोपी ने हथियार छीनकर भागने और फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हुई। मामले की जांच के बाद ही मुठभेड़ से जुड़े सभी तथ्यों की पूरी जानकारी सामने आएगी।
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