
पलामू। रविवार देर रात कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में ढेर होने की खबर सामने आते ही पलामू में हलचल तेज हो गई। करीब 20 वर्षों तक अपराध की दुनिया में सक्रिय रहे सुजीत सिन्हा का नाम इलाके में लंबे समय से खौफ और रंगदारी से जोड़ा जाता रहा। 42 वर्षीय सुजीत के खिलाफ हत्या, रंगदारी, बमबाजी और टेंडर विवाद सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अकेले पलामू जिले में ही उसके खिलाफ 40 से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। समय के साथ उसका आपराधिक नेटवर्क बढ़ता गया और कारोबारियों से लेकर स्थानीय प्रभावशाली लोगों तक पर दबाव बनाने के आरोप लगते रहे। उसकी आपराधिक गतिविधियों का असर सिर्फ बाहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निजी जिंदगी भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुई।
अपराध की वजह से परिवार से भी बढ़ती गई दूरी
सुजीत सिन्हा मूल रूप से पलामू जिले के हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के पथरा गांव का रहने वाला था। बाद में उसने मेदिनीनगर के श्रीराम पथ इलाके में अपना ठिकाना बनाया। लेकिन लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और पुलिस की कार्रवाई के कारण उसके परिवार को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
बताया जाता है कि पुलिस की लगातार छापेमारी और पूछताछ के बाद उसकी मां, भाई और बहन मेदिनीनगर छोड़कर रायपुर में रहने लगे थे। इस तरह समय के साथ सुजीत अपने परिवार से भी दूर होता चला गया।
सुजीत की पत्नी रिया सिन्हा भी आपराधिक मामलों के कारण जेल में बंद है। अपराध की दुनिया में बढ़ते प्रभाव के साथ उसका निजी जीवन लगातार बिखरता गया और अंततः उसका अधिकांश जीवन जेल और आपराधिक मामलों के बीच ही गुजरता रहा।
2005 में हत्या से शुरू हुआ आपराधिक सफर
सुजीत सिन्हा के अपराध की शुरुआत वर्ष 2005 में बताई जाती है। सेवा सदन इलाके में एक विवाद के बाद रिक्शा चालक कृष्णा साव की गोली मारकर हत्या करने का मामला उसके खिलाफ दर्ज हुआ था। यह घटना उसके अपराध की दुनिया में प्रवेश का बड़ा मोड़ बनी।
इसके बाद उसने रंगदारी का नेटवर्क खड़ा किया। इलाके में कारोबारियों से रंगदारी मांगने और विरोध करने वालों को धमकाने के आरोप उसके खिलाफ लगते रहे। समय के साथ बमबाजी और हिंसक घटनाओं में भी उसका नाम सामने आने लगा।
टेंडर विवाद में दो भाइयों की हत्या से बढ़ी दहशत
वर्ष 2007 में मेदिनीनगर के कांदू मोहल्ले में टेंडर विवाद से जुड़े दोहरे हत्याकांड ने सुजीत सिन्हा के नाम को अपराध की दुनिया में और चर्चित कर दिया। इस मामले में दो सगे भाइयों की हत्या हुई थी। बाद में इस प्रकरण में उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई।
हालांकि जेल जाने के बाद भी उसके आपराधिक नेटवर्क को लेकर पुलिस के सामने चुनौतियां बनी रहीं। उसके संपर्क और गिरोह से जुड़े लोगों पर समय-समय पर रंगदारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे।
कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों में कायम था खौफ
सुजीत सिन्हा पर अपने आपराधिक प्रभाव का इस्तेमाल कर कारोबारियों, ठेकेदारों और अन्य लोगों से रंगदारी वसूलने के आरोप लगते रहे। पुलिस के लिए उसकी गतिविधियां लंबे समय तक चुनौती बनी रहीं।
उसके खिलाफ दर्ज मामलों की लंबी सूची और लगातार सामने आने वाली आपराधिक घटनाओं ने उसे पलामू के कुख्यात गैंगस्टरों में शामिल कर दिया था। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों की गतिविधियां अलग-अलग समय पर सामने आती रहीं।
अब पुलिस मुठभेड़ में सुजीत सिन्हा के ढेर होने के बाद उसके करीब दो दशक लंबे आपराधिक सफर का अंत हो गया है। हालांकि उसके खिलाफ दर्ज मामलों और उसके आपराधिक नेटवर्क से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच का असर आगे भी दिखाई दे सकता है।
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