
गढ़वा। जिले के जंगलों में इन दिनों वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। हाथियों के झुंड से पहले से परेशान ग्रामीण अब बाघ की मौजूदगी की खबर से भी सहमे हुए हैं। रंका, भंडरिया, चिनिया, बरगढ़ और रमकंडा के जंगलों में बाघ और हाथियों की मौजूदगी की सूचना के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
रंका प्रखंड के ढेगुरा जंगल में बाघ ने तीन बकरियों और एक बछड़े को अपना शिकार बना लिया। इसके अलावा भंडरिया क्षेत्र में भी पशुओं के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। घटनाओं के बाद वन विभाग की टीम ने इलाके में मिले पदचिह्नों की जांच की। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में मिले पगमार्क बाघ के ही हैं।
जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि भंडरिया और बलीगढ़ क्षेत्र से भी बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर वन विभाग की टीम लगातार जंगल और आसपास के इलाकों में निगरानी कर रही है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए टीम सर्च अभियान भी चला रही है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से कहा गया है कि वे सुबह और शाम के समय जंगल की तरफ जाने से बचें। खासकर अकेले जंगल जाने या मवेशियों को चराने के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
हाथियों के हमले में चार दिन में दो मौत
बाघ की मौजूदगी से बढ़ी चिंता के बीच जंगली हाथियों का खतरा भी बना हुआ है। पिछले चार दिनों में रंका और चिनिया क्षेत्र में हाथियों के हमले में दो लोगों की जान जा चुकी है। दोनों ग्रामीणों को हाथियों ने कुचल दिया।
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में नाराजगी भी है। मौत की घटनाओं के बाद लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया और सड़क जाम किया। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से निकलने वाले जंगली जानवरों के कारण उनकी जान और संपत्ति दोनों खतरे में हैं। ग्रामीण वन विभाग से वन्यजीवों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और सुरक्षा के ठोस इंतजाम की मांग कर रहे हैं।
डीएफओ ने बताया कि दोनों घटनाओं की जानकारी विभाग को मिली है। मृतकों के परिजनों को नियम के अनुसार मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से फिर अपील की कि शाम के बाद और सुबह के शुरुआती समय में जंगल की ओर जाने से बचें।
इंसान और वन्यजीवों के बीच टकराव रोकने पर जोर
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जंगल वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। बाघ और हाथी दोनों ही जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। ऐसे में विभाग का प्रयास वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
फिलहाल वन विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों को भी किसी जंगली जानवर की गतिविधि दिखाई देने पर उसके करीब नहीं जाने और तत्काल वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है।
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