
रांची। चतरा जिले के टंडवा इलाके में मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में रांची की एनआईए की विशेष अदालत ने मंगलवार को सजा का ऐलान किया। अदालत ने मामले में दोषी पाए गए 12 लोगों को 8 से 10 साल तक जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषियों पर अलग-अलग राशि का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
अधिवक्ता संजय कुमार के अनुसार, अदालत ने 12 अगस्त को ही मामले के 12 आरोपितों को दोषी करार दिया था। मंगलवार को अदालत ने दोषियों की सजा की अवधि और जुर्माने की राशि पर फैसला सुनाया।
इन 12 दोषियों को सुनाई गई सजा
अदालत से सजा पाने वालों में विनोद गंझू, मुनेश गंझू, बिरबल गंझू, बिंदु गंझू, लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम, सुभान मियां, संजय जैन, प्रेम विकास, मुकेश गंझू, भीखन गंझू, गोपाल सिंह भोक्ता और अनिश्चय गंझू शामिल हैं।
अदालत ने विनोद गंझू, संजय जैन, प्रेम विकास और सुभान मियां सहित कई दोषियों को 8 साल की सजा सुनाई है। वहीं लक्ष्मण गंझू उर्फ कोहराम को 10 साल जेल की सजा दी गई है। दोषियों पर 40 हजार से 90 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है।
लेवी वसूली और उग्रवादी संगठन को फंडिंग का आरोप
यह मामला टंडवा क्षेत्र में संचालित कोयला परियोजनाओं से कथित लेवी वसूली और उग्रवादी संगठन टीपीसी तक रकम पहुंचाने से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपितों पर टीपीसी से जुड़े होने या संगठन के लिए लेवी वसूली में भूमिका निभाने के आरोप थे।
एनआईए ने जांच अपने हाथ में लेने के बाद मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था। जांच के दौरान कोयला कारोबार, ठेके और लेवी वसूली के बीच कथित संबंध सामने आने की बात एजेंसी की ओर से अदालत में कही गई थी।
कोयला परियोजनाओं से जुड़ी रकम पर जांच
एनआईए के मुताबिक, मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं से जुड़े ठेके और कोयला ढुलाई के कारोबार के माध्यम से उग्रवादी संगठन को कथित तौर पर आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोप था। इसी मामले में लंबे समय तक अदालत में सुनवाई चली।
टंडवा थाना में दर्ज कांड संख्या 2/2016 को एनआईए ने फरवरी 2018 में अपने हाथ में लिया था। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने कुल 16 आरोपितों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
12 दोषी, कुछ आरोपितों के मामले अलग
कुल 16 आरोपितों में से 12 को अब अदालत ने दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। वहीं आम्रपाली परियोजना के सीसीएल महाप्रबंधक अजीत कुमार ठाकुर को अदालत ने फैसला सुनाए जाने के दिन ही रिहा कर दिया था।
एक अन्य आरोपित आक्रमण के खिलाफ मामला अलग से चल रहा है। इस फैसले के बाद चतरा के कोयला परियोजनाओं से जुड़े टेरर फंडिंग मामले में लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है।
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