
रांची। चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत करमटांड़ जंगल में हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना ने एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे व्यवसायी संजय साव, उनकी पत्नी अर्चना देवी और उनके भांजे ध्रुव कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। बेहतर इलाज की उम्मीद में दिल्ली जा रहा यह परिवार कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सका।
संजय साव पलामू जिले के बकोरिया इलाके में लाइन होटल का संचालन करते थे। लगभग एक सप्ताह पूर्व होटल में अचानक लगी आग की चपेट में आकर वे गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने स्थिति गंभीर देखते हुए उन्नत उपचार के लिए दिल्ली ले जाने की सलाह दी थी। परिजन ने एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की और सोमवार की शाम करीब सात बजे विमान ने रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी। देर रात सूचना मिली कि विमान चतरा के जंगल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।
मूल रूप से लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र स्थित रखात गांव के निवासी संजय साव का जीवन पहले भी त्रासदियों से भरा रहा। वर्ष 2004 में नक्सली हिंसा में उनके पिता की हत्या कर दी गई थी। उस घटना के बाद परिवार चंदवा में आकर बस गया। पिता की असामयिक मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी संजय ने संभाली। उन्होंने बकोरिया में होटल व्यवसाय शुरू कर परिवार को संभालने का प्रयास किया।
बताया जाता है कि 16 फरवरी को होटल में खाना बनाते समय शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई थी। संजय उस समय होटल में मौजूद थे और काम में हाथ बंटा रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि वे उसकी चपेट में आ गए। सूचना मिलने पर सतबरवा थाना पुलिस ने दमकल विभाग को बुलाया और आग पर काबू पाया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार होटल में ज्वलनशील सामग्री होने के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया था। यह होटल राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे स्थित है।
घटना के बाद से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। संजय साव अपने पीछे दो नाबालिग बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनके सिर से एक साथ माता-पिता का साया उठ गया। दादा बालेश्वर साहू सहित पूरा परिवार गहरे सदमे में है। मां की हालत खबर सुनने के बाद से लगातार नाजुक बनी हुई है।
इलाके में शोक और स्तब्धता का माहौल है। एक सप्ताह पहले आग की त्रासदी और अब एयर एंबुलेंस दुर्घटना लगातार दो घटनाओं ने परिवार की खुशियां छीन लीं। यह हादसा न केवल तीन जिंदगियों के असमय अंत की कहानी है, बल्कि उन अधूरे सपनों और संघर्षों की भी दास्तां है, जिन्हें संजय साव ने विपरीत परिस्थितियों के बीच संजोया था।
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