
बलरामपुर। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय से कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर पत्र जारी किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पहले कलेक्टर कार्यालय द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, वहीं अब सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक शिक्षा ने भी मामले को गंभीर मानते हुए डीईओ से स्पष्टीकरण मांगा है।
संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय, अंबिकापुर द्वारा 3 जून 2026 को जारी कारण बताओ सूचना पत्र में कहा गया है कि, समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा एक शिक्षक को कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। पत्र में उल्लेख किया गया है कि यह कार्य निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया गया प्रतीत होता है तथा इससे शासकीय कार्यों के निर्वहन में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और उदासीनता परिलक्षित होती है।
संयुक्त संचालक ने डीईओ से पूछा है कि, उन्होंने किस नियम अथवा सक्षम अधिकारी की अनुमति से कलेक्टर के लेटरहेड का उपयोग किया। साथ ही तीन दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव उच्च कार्यालय को भेजने की चेतावनी भी दी गई है।
पहले कलेक्टर ने जारी किया था नोटिस
इससे पहले 3 जून को ही कलेक्टर कार्यालय बलरामपुर-रामानुजगंज ने भी जिला शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया था। कलेक्टर ने अपने नोटिस में स्पष्ट कहा था कि कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर हस्ताक्षर कर नोटिस जारी करना डीईओ के अधिकार क्षेत्र से बाहर का कार्य है। इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और अकर्मण्यता दर्शाने वाला बताया गया था।
कलेक्टर ने दो दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए थे तथा जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित करने की बात कही थी।

दो बार सामने आया मामला
उल्लेखनीय है कि, यह विवाद सोशल मीडिया तैरती दो आदेश से गहरा हो गया। पहला अप्रैल माह में वही दूसरा आदेश मई माह में कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा जारी किया गया था। खबर छपने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने सफाई देते हुए टंकण एवं लिपिकीय त्रुटि की बात कही थी।
अब जबकि एक ही दिन कलेक्टर और संयुक्त संचालक दोनों स्तरों से कारण बताओ नोटिस जारी हो चुके हैं, मामला महज एक प्रशासनिक भूल से आगे बढ़कर जवाबदेही के दायरे में पहुंच गया है।
बढ़े सवाल, क्या और भी हैं ऐसे मामले?
शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि अप्रैल और मई में दो अलग-अलग मामलों में कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड का उपयोग हुआ है, तो क्या ऐसे अन्य पत्र भी जारी हुए हैं जो अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं।

फिलहाल पूरे मामले में निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी के जवाब पर टिकी हैं। कलेक्टर और संयुक्त संचालक, दोनों कार्यालयों द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि विभाग इस प्रकरण को साधारण त्रुटि मानता है या फिर प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन के गंभीर मामले के रूप में देखता है।
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