
नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में किए गए सैन्य हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई देशों और संगठनों ने इसे वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है, जबकि कुछ नेताओं ने इस कार्रवाई को तानाशाही शासन के खिलाफ दबाव के रूप में उचित ठहराया है। इन घटनाओं ने लैटिन अमेरिका समेत पूरी दुनिया में तनाव बढ़ा दिया है।
रूस के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमले को “सशस्त्र आक्रामकता” करार देते हुए कहा कि ऐसे कदम हालात को और बिगाड़ सकते हैं। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग का समर्थन किया।
मैक्सिको ने एकतरफा सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए संवाद और कूटनीति को ही समाधान का रास्ता बताया। उरुग्वे, चिली और कोलंबिया ने भी इसी तरह अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि बमबारी और जबरन हस्तक्षेप वैश्विक स्थिरता के लिए खतरनाक मिसाल हैं। यूरोपीय संघ ने स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि वह इस सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं था और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करता है।
अर्जेंटीना और इक्वाडोर के राष्ट्रपतियों ने वेनेजुएला की मौजूदा सरकार को क्षेत्रीय अस्थिरता के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए अमेरिका के दबाव को सही ठहराया। ईरान, बेलारूस और लेबनानी संगठन हिज़्बुल्लाह ने अमेरिका की तीखी आलोचना करते हुए इसे खुला आक्रमण बताया।
अमेरिकी हमलों ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर कई देश इसे नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा मान रहे हैं, तो कुछ इसे वेनेजुएला में राजनीतिक बदलाव की दिशा में निर्णायक कदम बता रहे हैं।
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