
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन माह 30 जुलाई से शुरू हो चुका है और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। सावन के साथ ही झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए देश के विभिन्न राज्यों से कांवरियों का आना-जाना भी शुरू हो गया है। इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित पंडित दीनदयाल मांगलिक भवन एक बार फिर शिवभक्तों की सेवा का प्रमुख पड़ाव बना हुआ है।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कांवरिया सेवा समिति की ओर से बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क ठहरने और तीनों समय भोजन की व्यवस्था की गई है। शुक्रवार को मध्यप्रदेश के अनूपपुर और छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले से आए 38 कांवरियों का जत्था रामानुजगंज पहुंचा, जहां समिति के सदस्यों ने उनका स्वागत कर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
बताया गया कि रामानुजगंज से सुल्तानगंज की दूरी लगभग 491 किलोमीटर है। श्रद्धालु पहले सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पहुंचते हैं और वहां भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
मनेंद्रगढ़ से आए कांवरिया मुकेश शर्मा ने बताया कि उनके दल में छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ और मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के करीब 38 श्रद्धालु शामिल हैं। सभी बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के लिए निकले हैं। उन्होंने कहा कि रामानुजगंज की कांवरिया सेवा समिति पिछले कई वर्षों से श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर रही है।

मुकेश शर्मा ने बताया कि पिछले चार वर्षों से उनका दल रामानुजगंज में ही रुकता है। यहां सुबह चाय और नाश्ते से लेकर दोपहर एवं रात के भोजन तक की उत्कृष्ट व्यवस्था रहती है। समिति के सभी कार्यकर्ताओं का व्यवहार बेहद आत्मीय और सहयोगपूर्ण है। उन्होंने अन्य कांवरियों से भी अपील की कि बाबा धाम की यात्रा के दौरान रामानुजगंज में जरूर ठहरें।

इस दौरान श्रद्धालुओं के वाहनों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। अनूपपुर और मनेंद्रगढ़ से आए कांवरियों ने अपने वाहनों को फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया था। इतना ही नहीं, एक वाहन के अगले हिस्से में भगवान शिव के प्रतीक शिवलिंग की स्थापना भी की गई थी, जो श्रद्धालुओं और राहगीरों के आकर्षण का केंद्र बना रहा।

सावन के पूरे महीने रामानुजगंज में कांवरिया सेवा समिति की ओर से इसी प्रकार सेवा कार्य जारी रहेगा, जिससे बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले हजारों शिवभक्तों को विश्राम और भोजन की सुविधा मिल सके।
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