रांची। झारखंड में कोरोना के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार की तैयारियां अब भी जारी हैं। लगभग हर जिले के सदर अस्पताल को एक्टिव किया जा रहा है। जिन जिलों में जांच सेंटर की संख्या कम थी या जांच सेंटर नहीं थे, वहां भी सेंटर खोले जा रहे हैं। इसी क्रम में राज्य के 12 जिले में तैयार आरटी-पीसीआर लैब सात जनवरी से एक्टिव को जाएंगे। इसके बाद से इन जिले के लोगों को आरटी-पीसीआर टेस्ट के लिए दूसरे जिले पर निर्भर नहीं रहना होगा। सेंटर एक्टिव करने की तैयारियां अपने अंतिम चरण में है।
स्वास्थ्य विभाग ने सिविल सर्जन को दिए निर्देश
बताते चलें कि स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना के नए वैरिएंट बीएफ-7 से निपटने के लिए 12 जिलों में स्थापित आरटी-पीसीआर जांच शुरू करने का निर्देश संबंधित जिले के सिविल सर्जनों को दिए हैं। अभी तक इन जिलों के सैंपल जांच के लिए दूसरे जिलों के मेडिकल कॉलेजों या सदर अस्पतालों को भेजे जाते थे, जहां पूर्व में लैब स्थापित की जा चुकी थी। जिन जिलों में सात जनवरी से जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं उनमें गढ़वा, गिरिडीह, चतरा, लातेहार, लोहरदगा, जामताड़ा, पाकुड़, कोडरमा, खूंटी, रामगढ़, सिमडेगा तथा सरायकेला खरसावां शामिल हैं।
30 लाख रुपये में तैयार हुआ है एक लैब
जिन 12 जिलों में आरटी-पीसीआर लैब बनाए गए हैं, उनको बनाने में प्रति लैब 30 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। बताते चलें कि इन जिलों में इमरजेंसी कोविड रेस्पांस पैकेज-2 के तहत केंद्र से मिली राशि से आरटी-पीसीआर लैब बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 26 दिसंबर को कोरोना को लेकर हुई उच्च स्तरीय बैठक में इन जिलों में जल्द से जल्द जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे।
अपर अभियान निदेशक ने भेजा पत्र
बताते चलें कि 12 जिलों के सिविल सर्जन को स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सह अपर अभियान निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने पत्र भेजकर कहा है कि कोरोना के नए वैरिएंट बीएफ-7 के देश में दस्तक देने से पहले राज्य के सभी जिलों में ही आरटी-पीसीआर जांच बहुत जरूरी है, जिससे ओपीडी में आने वाले संदिग्ध रोगियों की जांच कर समय पर उसके संक्रमित होने की पहचान की जा सके। उनसे मिली जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा पूर्व में उपलब्ध कराए गए ले आउट तथा आइसीएमआर की मानकों के अनुसार आरटी-पीसीआर लैब में जांच शुरू करने को कहा गया है।
मैनपावर को मिल चुका है प्रशिक्षण
12 जिलों के आरटी-पीसीआर लैब संचालित करने के लिए दो-दो लैब तकनीशियन तथा एक-एक पैथोलाजिस्ट या माइक्रोबायालाजिस्ट को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन्हें रिम्स के माइक्रोबायोलाजी विभाग के प्रभारी डॉ मनोज कुमार से कॉर्डिनेशन बनाते हुए आइसीएमआर से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए सैंपल डाटा वैलिडेशन का कार्य करने को कहा है। जांच के लिए किट तथा अन्य सामग्री की व्यवस्था जिला स्तर पर की जाएगी। सभी संबंधित जिलों से सात जनवरी तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी गई है।
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