रांची। हजारीबाग में अधिवक्ता अनुष्का चक्रवर्ती की संदिग्ध मौत के मामले की जांच अब पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) रैंक के अधिकारी करेंगे। सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अंडरटेकिंग देकर अदालत को इसकी जानकारी दी। सरकार की ओर से बताया गया कि अब तक मामले का अनुसंधान सब-इंस्पेक्टर (एसआई) स्तर के अधिकारी कर रहे थे, लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी डीएसपी रैंक के अधिकारी को सौंपी जाएगी।
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार को डीएसपी रैंक के अधिकारी से मामले का अनुसंधान कराने और जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया। अदालत ने दो नवंबर तक अनुसंधान की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है। मामले की अगली सुनवाई दो नवंबर को सुबह 11:30 बजे होगी।
उल्लेखनीय है कि हजारीबाग के बड़ा बाजार थाना क्षेत्र स्थित गुप्ता कॉम्प्लेक्स के एक फ्लैट में अधिवक्ता अनुष्का चक्रवर्ती का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था। अनुष्का ने करीब तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था और वह अपने पति के साथ इसी फ्लैट में रह रही थीं। उनकी मौत के बाद परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या करने का आरोप लगाया था।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया गया कि अनुष्का की मौत से जुड़ी कई परिस्थितियां संदेह पैदा करती हैं। महज तीन घंटे के भीतर शव का दो बार पोस्टमार्टम किए जाने पर भी सवाल उठाए गए। अदालत को बताया गया कि जिस स्थिति में अनुष्का का शव मिला था, उसमें उनके पैर जमीन से सटे हुए थे। साथ ही शरीर पर चोट के निशान होने की बात भी कही गई। इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया गया।
मृतका के भाई देवजीत चक्रवर्ती ने झारखंड उच्च न्यायालय में क्रिमिनल रिट याचिका दायर कर पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, अनुष्का के पिता सुनील कुमार चक्रवर्ती ने अपने दामाद और उसके माता-पिता पर दहेज के लिए बेटी को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने तथा उसकी हत्या कर शव को पंखे से लटकाने का आरोप लगाया है।
अब डीएसपी रैंक के अधिकारी मामले का अनुसंधान करेंगे। अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को अदालत के समक्ष जांच की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
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