बलरामपुर। रामानुजगंज के गांधी मैदान में सात दिवसीय रामलीला महोत्सव का शुभारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से पहुंचे कलाकारों ने पहले दिन अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मंच पर रामायण के प्रसंगों को जीवंत होते देख लोग देर तक कार्यक्रम से जुड़े रहे। कलाकारों के अभिनय और संवादों पर दर्शकों ने तालियां बजाकर सराहना की। मंडली के सदस्य छत्तीसगढ़ सहित दूसरे राज्यों में भी रामलीला का मंचन कर भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
सात दिनों तक अलग-अलग प्रसंगों का होगा मंचन
रामलीला महोत्सव के दौरान मिर्जापुर की मंडली प्रतिदिन मंच पर रामकथा के अलग-अलग प्रसंग प्रस्तुत करेगी। इसमें भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर उनके बाल्यकाल, युवावस्था और वनवास तक की घटनाओं को नाट्य रूप में दिखाया जाएगा। आयोजकों का प्रयास है कि सात दिनों के कार्यक्रम में रामायण की प्रमुख घटनाओं को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाए, ताकि नई पीढ़ी भी भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से परिचित हो सके।
मिर्जापुर की मंडली छत्तीसगढ़ के कई शहरों में करती है मंचन
रामलीला मंडली का संचालन करने वाले दिनेश चौरसिया ने बताया कि उनकी टीम हर साल रामानुजगंज पहुंचकर रामलीला का आयोजन करती है। इस बार भी सात दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हो चुकी है। उनकी मंडली में करीब 11 कलाकार हैं, जो छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में जाकर रामलीला का मंचन करते हैं। बलरामपुर, रामानुजगंज, अंबिकापुर और लखनपुर सहित कई स्थानों पर टीम अपनी प्रस्तुति दे चुकी है।
दिनेश चौरसिया के अनुसार, मंडली के कलाकार रामायण के विभिन्न पात्रों की भूमिका निभाते हैं। कोई भगवान श्रीराम तो कोई रावण, राजा जनक और राजा दशरथ का किरदार निभाता है। सीमित समय में पूरी रामकथा के प्रमुख प्रसंगों को लोगों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता रहती है।
राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की भूमिका भी निभाते हैं कलाकार
रामलीला में व्यास की भूमिका निभा रहे विपिन द्विवेदी ने बताया कि उनकी टीम के सदस्य सालभर अलग-अलग स्थानों पर जाकर रामलीला और श्रीराम कथा का आयोजन करते हैं। रामानुजगंज में भी हर वर्ष की तरह इस बार कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मंडली के कलाकार ही राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, रावण, बाली और सुग्रीव जैसे प्रमुख पात्रों का अभिनय करते हैं। दर्शकों की सराहना से कलाकारों को आगे बेहतर प्रस्तुति देने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि आयोजन के दौरान लोगों से मिलने वाला सहयोग ही मंडली के कलाकारों और उनके परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
धार्मिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल
काशी मिर्जापुर रामलीला मंडल के सदस्यों का कहना है कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए धार्मिक मान्यताओं, संस्कारों और सांस्कृतिक परंपराओं को भी लोगों तक पहुंचाया जाता है। मंडली का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्शों और रामायण की शिक्षाओं से नई पीढ़ी को परिचित कराना है। इसी सोच के साथ कलाकार अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर रामलीला का मंचन करते हैं और इस परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ अपनी आजीविका भी चलाते हैं।
रामलीला मंडली में शामिल हैं 11 सदस्य
रामलीला मंडली के संचालक दिनेश कुमार चौरसिया हैं। उनके साथ सुरेश कुमार चौरसिया, सुंदरम कुमार, राघव प्रसाद, बिपिन दुबे, राजेश चौरसिया, कमलेश आदिवासी, कमलेश चौरसिया, सूर्यभान गौतम और विजय कुमार भी अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। सभी कलाकार मिलकर रामायण के प्रमुख प्रसंगों का मंचन कर रहे हैं और अपनी कला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों को लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
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