
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को छह दिन की ईडी रिमांड पूरी होने के बाद बुधवार को अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें आठ दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अब उन्हें 23 सितंबर को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।
प्रवर्तन निदेशालय ने 11 सितंबर को बोरघरिया को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद विशेष अदालत ने उन्हें छह दिन की ईडी हिरासत में भेजा था। इस दौरान जांच एजेंसी ने कथित वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और उत्कर्ष चंद्राकर के साथ संपर्क से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की।
ईडी के अधिवक्ता सौरभ कुमार पाण्डेय के अनुसार, जांच में बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच बैंक के माध्यम से वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आई है। एजेंसी का दावा है कि पूछताछ के दौरान बोरघरिया ने उत्कर्ष से रकम को लोन के रूप में लेने की बात कही, लेकिन इस संबंध में कोई दस्तावेजी सुरक्षा या अन्य प्रमाण जांच एजेंसी को नहीं मिला।
ईडी की ओर से यह भी कहा गया कि दोनों के बीच व्हाट्सएप के माध्यम से बातचीत हुई थी। एजेंसी ने इन डिजिटल संवादों और बैंक लेनदेन को जांच का हिस्सा बनाया है। ईडी के मुताबिक, बोरघरिया से रकम के स्रोत और लेनदेन को लेकर पूछताछ की गई, लेकिन एजेंसी उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई।
वहीं, बचाव पक्ष ने न्यायिक हिरासत का विरोध करते हुए अदालत में आवेदन पेश किया। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि बोरघरिया के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है और उनका नाम मूल पुलिस एफआईआर में भी नहीं था। मोबाइल फोन से संबंधित कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई गई और कहा गया कि डिवाइस को उनकी अनुमति के बिना लिया गया तथा उसका डाटा निकाला गया।
ईडी ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि धन शोधन निवारण कानून की धारा 17 के तहत जांच एजेंसी को तलाशी लेने का अधिकार है। एजेंसी ने अदालत के समक्ष यह भी दावा किया कि तलाशी के दौरान बोरघरिया ने अपना मोबाइल छिपाकर रखा था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने बचाव पक्ष का आवेदन स्वीकार नहीं किया और ईडी की ओर से मांगी गई न्यायिक हिरासत मंजूर कर दी।
यह मामला CGPSC की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित है। ईडी ने इससे पहले मामले में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और उत्कर्ष चंद्राकर समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच एजेंसी का कहना है कि 2020 और 2021 की राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, प्रश्नपत्रों की जानकारी पहले से उपलब्ध कराने और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच की जा रही है।
बोरघरिया वर्ष 2019 से 2022 के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में ओएसडी के पद पर भी रह चुके हैं। वर्तमान में वह बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में अपर कलेक्टर के पद पर पदस्थ हैं।
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