
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बलरामपुर द्वारा कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर जारी किए गए कारण बताओ सूचना पत्र ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। मामला सामने आने के बाद अब सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग ने भी इसे गंभीरता से लिया है। संयुक्त संचालक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पत्र जारी किया जाना उचित नहीं है और इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
दरअसल, सोशल मीडिया और विभागीय समूहों में एक कारण बताओ सूचना पत्र वायरल हो रहा है, जो कलेक्टर कार्यालय, जिला बलरामपुर-रामानुजगंज के लेटरहेड पर जारी किया गया है। पत्र में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसंतपुर में पदस्थ व्याख्याता (जीव विज्ञान) राजेंद्र कुमार देवांगन को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि पत्र पर हस्ताक्षर जिला शिक्षा अधिकारी के हैं।
क्या है पूरा मामला?
27 मई 2026 को जारी पत्र में उल्लेख किया गया है कि, लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा जारी आरोप पत्र के संबंध में निर्धारित अवधि के भीतर प्रतिवाद प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी आधार पर संबंधित शिक्षक को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करते हुए 1 जून 2026 तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि, निर्धारित समयावधि में जवाब प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध पृथक आरोप पत्र जारी करने का प्रस्ताव लोक शिक्षण संचालनालय को भेजा जाएगा।
लेटरहेड को लेकर खड़े हुए सवाल
मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उक्त पत्र कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर जारी किया गया है, जबकि यह पत्राचार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से संबंधित है। दस्तावेज सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में अधिकार क्षेत्र और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी विभागीय अधिकारी द्वारा कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड का उपयोग कर इस प्रकार का पत्र जारी किया जा सकता है? यदि नहीं, तो इसके पीछे क्या कारण है?
संयुक्त संचालक ने कहा- उचित नहीं
इस संबंध में जब सरगुजा संभाग के संयुक्त संचालक शिक्षा विभाग संजय गुप्ता से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा, आपके माध्यम से यह जानकारी मिली है कि बलरामपुर जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड पर पत्र जारी किया गया है। प्रथम दृष्टया यह उचित प्रतीत नहीं होता। मामले की जानकारी ली जाएगी तथा जिला शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
संयुक्त संचालक के इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अब विभागीय स्तर पर इस पूरे प्रकरण की जांच और स्पष्टीकरण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

शिक्षा विभाग में चर्चा का विषय बना मामला
पत्र सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के कर्मचारियों और शिक्षकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कई कर्मचारी इसे प्रशासनिक प्रक्रिया में गंभीर चूक मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे तकनीकी त्रुटि बता रहे हैं।
हालांकि अंतिम स्थिति जांच और विभागीय स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन संयुक्त संचालक के बयान के बाद यह मामला अब जिला स्तर से निकलकर संभागीय स्तर तक पहुंच चुका है।
अब सबकी नजरें विभागीय कार्रवाई पर
संयुक्त संचालक द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कहे जाने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले में क्या जवाब देते हैं और विभाग इस पूरे प्रकरण पर क्या कार्रवाई करता है। यदि नियमों के विपरीत कलेक्टर कार्यालय के लेटरहेड का उपयोग किया गया है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का विषय बन सकता है।
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