
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी परिसरों के दुरुपयोग का एक और मामला सामने आया है। गरियाबंद के बाद अब सूरजपुर जिले के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस से जुड़ा एक पुराना वीडियो वायरल होने से वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वीडियो सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है और अब पुलिसिया कार्रवाई की भी तैयारी है।
सूरजपुर जिले के रामानुजनगर ब्लॉक स्थित कुमेली फॉरेस्ट रेस्ट हाउस से जुड़े एक वीडियो ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में रेस्ट हाउस के भीतर डांस कार्यक्रम, शराबखोरी और खुलेआम पैसों की बारिश करते लोग नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो करीब एक से दो साल पुराना है, लेकिन इसके सामने आते ही विभाग हरकत में आ गया।
प्रारंभिक जांच के बाद सरगुजा के मुख्य वन संरक्षक ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर और एक फॉरेस्टर को निलंबित कर दिया है, जबकि उस समय पदस्थ रेंजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक संबंधित रेंजर अब पदोन्नति के बाद एसडीओ के पद पर कार्यरत हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि रेस्ट हाउस में यह कार्यक्रम किसी जनपद सदस्य द्वारा आयोजित किया गया था। आयोजन के लिए हॉल में गद्दे तक बिछाए गए थे और कार्यक्रम देर रात तक चला। वीडियो में कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधि और शासकीय कर्मचारी भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
रेस्ट हाउस के चौकीदार ने जांच टीम को दिए बयान में कहा कि तत्कालीन रेंजर के पास ही रेस्ट हाउस की चाबी रहती थी और उन्हीं के निर्देश पर नेताओं को भवन उपलब्ध कराया जाता था। चौकीदार के अनुसार, फोन पर आदेश मिलता था कि “नेताजी लोग आ रहे हैं, व्यवस्था कर देना।”
वीडियो वायरल होने के बाद सूरजपुर के डीएफओ ने मामले की विस्तृत जांच कराई। फॉरेस्ट एसडीओ के नेतृत्व में बनी टीम ने चौकीदार, सरपंच और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए। जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएफओ ने सूरजपुर एसपी को पत्र लिखकर वीडियो में नजर आ रहे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है। माना जा रहा है कि जल्द ही आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले गरियाबंद जिले में एक ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें सरकारी कार्यक्रम के दौरान नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे। उस मामले में भी प्रशासन को सख्त कदम उठाने पड़े थे।
सूरजपुर का यह मामला अब केवल विभागीय अनुशासन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग, अधिकारियों की भूमिका और राजनीतिक संरक्षण जैसे सवालों को भी जन्म दे रहा है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे तय करेंगे कि कार्रवाई कितनी दूर तक जाती है।
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