
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। सुशासन तिहार के तहत बलरामपुर पहुंचे मुख्यमंत्री ने रविवार को आयोजित समीक्षा बैठक में प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सख्त रुख अपनाया। बैठक के दौरान लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक अधिकारी द्वारा सड़क मरम्मत की सही जानकारी नहीं दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने कड़ी नाराजगी जताते हुए उन्हें तत्काल बैठक से बाहर जाकर सही जानकारी लाने के निर्देश दिए। इस घटनाक्रम से बैठक कक्ष में कुछ समय के लिए सन्नाटा छा गया और संदेश स्पष्ट था अब किसी भी स्तर पर लापरवाही या बहानेबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हालांकि, इसी सख्ती के बीच मुख्यमंत्री का संवेदनशील पक्ष भी सामने आया। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी शासकीय कार्यालय सेवा के तीर्थ हैं और यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और सहानुभूति का पात्र है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे जनता की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।
सड़कों पर विशेष जोर, मानसून से पहले मरम्मत अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी सरकार का वास्तविक विकास सड़कों से दिखाई देता है। उन्होंने निर्देश दिए कि मानसून से पहले सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत पूरी कर ली जाए और आबादी वाले क्षेत्रों की सड़कों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस कार्य में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण, घर बैठे मिलेगा खसरा-नक्शा
आम नागरिकों को राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश के सभी राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। अब भूमि संबंधी दस्तावेज, जैसे खसरा और नक्शा, प्रमाणित डिजिटल हस्ताक्षर के साथ सीधे नागरिकों को उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, शीघ्र ही मुख्यमंत्री सहायता केंद्र शुरू किया जाएगा, जहां टोल फ्री नंबर के माध्यम से लोग अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। कलेक्टरों को निर्देश दिए गए कि राजस्व प्रकरणों का समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

जिला खनिज निधि का उपयोग गांवों के लिए अनिवार्य
जिला खनिज निधि (डीएमएफ) के उपयोग को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि निधि का कम से कम 70 प्रतिशत हिस्सा खदान प्रभावित गांवों के विकास पर ही खर्च किया जाए। मुख्यालय स्तर पर अनावश्यक खर्च को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया गया।
पेयजल, स्वास्थ्य और कृषि पर विशेष तैयारी के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी नागरिक पेयजल संकट का सामना न करे। जहां आवश्यक हो, वहां टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही गर्मी और वर्षा के बीच फैलने वाली मौसमी बीमारियों से निपटने के लिए अग्रिम तैयारी करने के निर्देश दिए गए। कृषि क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि किसानों को धान, बीज और खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की समस्या नहीं होनी चाहिए।
अधिकारियों के मूल्यांकन और सख्त कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों का नियमित मूल्यांकन करें और आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई करने से न हिचकें। उन्होंने दोहराया कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।
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