
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। जिले के रामानुजगंज में महतारी वंदन योजना के तहत चल रही ई-केवाईसी प्रक्रिया आम लोगों, खासकर बुजुर्गों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। तकनीकी खामियों और संसाधनों की कमी के चलते कई पात्र हितग्राही अब भी योजना के लाभ से वंचित हैं।
बलरामपुर जिले में महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया इन दिनों तेज कर दी गई है। रामानुजगंज नगर के विभिन्न वार्डों के आंगनबाड़ी केंद्रों में कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा आधार आधारित फिंगरप्रिंट के जरिए ई-केवाईसी की जा रही है। हालांकि, जमीनी स्तर पर यह प्रक्रिया कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
रामानुजगंज के वार्ड क्रमांक 14 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में उन लाभार्थियों का ई-केवाईसी किया जा रहा है, जिनकी राशि केवाईसी न होने के कारण अटकी हुई थी। राज्य सरकार की पहल पर यह प्रक्रिया शुरू तो हो गई है, लेकिन तकनीकी सीमाओं के कारण कई जरूरतमंद अब भी जूझ रहे हैं।
सबसे ज्यादा दिक्कत बुजुर्ग लाभार्थियों को हो रही है। उम्र के साथ फिंगरप्रिंट धूमिल हो जाने के कारण मशीन उन्हें पहचान नहीं पा रही है, जिससे उनका ई-केवाईसी नहीं हो पा रहा। वार्ड क्रमांक 14 की करीब 80 वर्षीय लखमणिया देवी इसका उदाहरण हैं। उनके पास न तो मोबाइल फोन है और न ही कोई परिजन, जो ओटीपी प्रक्रिया में मदद कर सके। वह दूसरों के सहारे जीवन यापन कर रही हैं, ऐसे में तकनीकी प्रक्रिया उनके लिए और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

इसी तरह कई अन्य बुजुर्ग भी फिंगरप्रिंट आधारित सत्यापन में असफल हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर केंद्रों पर रेटीना स्कैन जैसी वैकल्पिक व्यवस्था होती, तो ऐसे हितग्राहियों का भी आसानी से ई-केवाईसी हो सकता था। लेकिन उपकरणों की कमी के कारण वे योजना के लाभ से वंचित रह जाने की आशंका में हैं।
स्थानीय निवासी सरस्वती गुप्ता (60) ने बताया कि उन्हें भी ई-केवाईसी कराने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई जगह भटकने के बाद अंततः कोर्ट के पीछे स्थित एक आधार केंद्र में 50 रुपये शुल्क देकर प्रक्रिया पूरी करानी पड़ी।
फिलहाल, क्षेत्र में ई-केवाईसी की प्रक्रिया जारी है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि तकनीकी संसाधनों की कमी और वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में पात्र हितग्राही परेशान हैं। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि कोई भी जरूरतमंद योजना के लाभ से वंचित न रहे।
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