
रायपुर। छत्तीसगढ़ में दूध और उससे बने उत्पादों के नाम पर चल रहे मिलावटी कारोबार पर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एनालॉग पनीर समेत ऐसे डेयरी उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है, जिन्हें गैर-दुग्ध सामग्री से तैयार करने के बावजूद असली दूध से बने उत्पाद के रूप में बेचा जाता है। गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही यह प्रतिबंध पूरे प्रदेश में लागू हो गया है।
सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन कारोबारियों पर पड़ेगा, जो दूध की जगह वनस्पति तेल, वनस्पति वसा या अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल कर पनीर, क्रीम, मक्खन या दूसरे डेयरी उत्पाद तैयार करते हैं और उन्हें असली डेयरी उत्पाद के तौर पर बाजार में बेचते हैं। अब ऐसे उत्पादों का निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री नहीं की जा सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के अगले ही दिन जारी हुआ आदेश
स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनालॉग पनीर और इससे जुड़े नकली डेयरी उत्पादों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। घोषणा के ठीक अगले दिन राज्य सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर इस फैसले को कानूनी रूप दे दिया।
सरकार का मानना है कि गैर-दुग्ध सामग्री से तैयार उत्पादों को दूध से बने पनीर या अन्य डेयरी उत्पाद के रूप में बेचना उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के साथ उनके स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
दूध की जगह वनस्पति वसा-तेल से बने उत्पाद निशाने पर
नए आदेश के तहत उन उत्पादों पर रोक लगाई गई है, जिनमें दूध या दुग्ध पदार्थों की जगह वनस्पति वसा, वनस्पति तेल अथवा अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन उन्हें पनीर, क्रीम, मक्खन या दूसरे डेयरी उत्पाद के नाम से बाजार में बेचा जाता है।
सरकार ने ऐसे उत्पादों के केवल बिक्री पर ही नहीं, बल्कि उनके पूरे कारोबार पर रोक लगाई है। यानी निर्माण से लेकर प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और वितरण तक सभी गतिविधियां प्रतिबंध के दायरे में रहेंगी।
पूरे छत्तीसगढ़ में लागू रहेगा प्रतिबंध
गजट अधिसूचना के अनुसार यह फैसला प्रदेश के सभी जिलों में लागू होगा। इसका मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों से बचाना है, जो असली दूध से बने होने का भ्रम पैदा करते हैं।
खाद्य सुरक्षा विभाग को इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है। आने वाले दिनों में डेयरी उत्पादों की जांच और बाजार में निगरानी बढ़ने की संभावना है।
खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई
राज्य सरकार ने यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 18 और धारा 30 के तहत की है। सरकार का कहना है कि आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।
एक साल या FSSAI के अंतिम नियम तक प्रभावी
सरकार द्वारा लगाया गया प्रतिबंध राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, यदि इस अवधि से पहले भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) इस संबंध में अंतिम नियम जारी कर देता है, तो उसके अनुसार आगे की व्यवस्था तय होगी। यानी दोनों में से जो पहले होगा, उसके आधार पर प्रतिबंध की स्थिति निर्धारित होगी।
कुछ मानकीकृत उत्पाद प्रतिबंध से बाहर
सरकार ने सभी प्रकार के डेयरी या डेयरी जैसे उत्पादों पर रोक नहीं लगाई है। वर्तमान खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत वैध माने जाने वाले कुछ मानकीकृत उत्पादों को इस आदेश से बाहर रखा गया है। इनमें फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद शामिल हैं।
मिलावट के खिलाफ आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली उत्पादों के कारोबार को लेकर निगरानी जारी रहेगी। खाद्य सुरक्षा विभाग को नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अब बाजार में बिकने वाले पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों की जांच पर भी विशेष नजर रहेगी।
सरकार के इस फैसले को उपभोक्ताओं को मिलावटी और भ्रम पैदा करने वाले डेयरी उत्पादों से बचाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। हालांकि, इसकी वास्तविक प्रभावशीलता अब खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच और प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर होने वाली कार्रवाई से तय होगी।
इसे भी पढ़ें……
जंतर-मंतर प्रदर्शन में PM मोदी पर टिप्पणी के बाद 15 साल की किशोरी ने मांगी माफी


