बलरामपुर, विष्णु पांडेय। बोर्ड परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाने और परीक्षा तनाव को दूर करने के उद्देश्य से आज शनिवार काे बलरामपुर जिले के रामानुजगंज स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय प्रांगण में “परीक्षा का तनाव–जीत की तैयारी” कार्यशाला का आयोजन किया गया। दीन-हीन सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को एग्जाम फियर, स्ट्रेस और कन्फ्यूजन से निपटने के व्यावहारिक सूत्र बताए गए।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मनीषा नेताम विशिष्ट अतिथि रहीं। जिले के वनमंडलाधिकारी आलोक वाजपेई, जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव, एसडीएम आनंद राम नेताम, अधिवक्ता जयप्रकाश गुप्ता सहित कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। भाजपा के वरिष्ठ एवं कनिष्ठ कार्यकर्ताओं की भी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने माहौल को प्रेरणादायक बना दिया।
फेल हाेना अंत नहीं, बल्कि अगली तैयारी की शुरूआत : मनीषा
दीन-हीन सेवा समिति की संचालक मनीषा नेताम ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा से डरने के बजाय तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। परिणाम की चिंता छोड़कर नियमित रिवीजन, पॉइंट्स में अध्ययन और शिक्षकों से संवाद ही सफलता का आधार है। उन्होंने ओवरकॉन्फिडेंस से बचने, असफलता से न घबराने और लाइब्रेरी संस्कृति को अपनाने की सलाह दी। “फेल होना अंत नहीं है, बल्कि अगली तैयारी की शुरुआत है,” उन्होंने कहा।
मुख्य अतिथि रामविचार नेताम ने विद्यार्थियों से अर्जुन जैसी एकाग्रता अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भविष्य निर्माण का यह स्वर्णिम समय है, जिसे मोबाइल की लत या भटकाव में गंवाया नहीं जाना चाहिए। टेक्नोलॉजी का उपयोग सकारात्मक दिशा में, शोध और अध्ययन के लिए करना चाहिए। उन्होंने अपने छात्र जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि संसाधनों की कमी कभी भी प्रतिभा को रोक नहीं सकती, यदि संकल्प और अनुशासन मजबूत हो। “हमें अपनी प्रतिभा को दबाना नहीं, उसे उड़ान देनी है,” उन्होंने कहा।
वनमंडलाधिकारी आलोक वाजपेई ने अपने जीवन का प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि प्रारंभिक असफलताओं के बावजूद निरंतर परिश्रम से उन्होंने इंजीनियरिंग की और बाद में प्रशासनिक सेवा में चयनित होकर 2018 बैच के आईएफएस अधिकारी बने। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता शोर नहीं करती, बल्कि मेहनत का परिणाम स्वयं बोलता है। तनावमुक्त रहकर बड़े सपने देखने और स्वयं से प्रतिस्पर्धा करने की सीख उन्होंने दी।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक चरण है। संयम, सकारात्मक सोच, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास ही सफलता का वास्तविक मार्ग है। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में नई ऊर्जा और लक्ष्य के प्रति स्पष्टता का संचार किया।
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