नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता के चोरबगान सार्वजनीन पूजा पंडाल में हुई भगदड़ ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। महासप्तमी की शाम हुई इस दर्दनाक घटना में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। मृतकों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। किसी ने अपने पति को खोया तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। दो सहेलियां साथ में पूजा देखने निकली थीं, लेकिन दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं। इस हादसे में कुल 16 परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
मृतकों में 17 लोग पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों के रहने वाले थे, जबकि बिहार के एक परिवार के पिता और बेटे की भी जान चली गई। कोई कई दिनों से दुर्गा पूजा घूमने की तैयारी कर रहा था, तो कोई काम खत्म होने के बाद दोस्तों के साथ पंडाल देखने पहुंचा था। लेकिन अचानक मची भगदड़ ने इन सभी की जिंदगी बदल दी। हादसे के बाद सामने आ रही परिजनों की आपबीती घटना की भयावहता को बयां कर रही है।
बिहार से पूजा देखने आया परिवार, पिता-पुत्र की मौत
बिहार के रहने वाले अभिषेक श्रीवास्तव अपनी पत्नी निभा, सात वर्षीय बेटे अयांश और परिवार के तीन अन्य सदस्यों के साथ कोलकाता में दुर्गा पूजा देखने पहुंचे थे। परिवार के लिए यह यात्रा खुशियों से भरी होनी थी, लेकिन शनिवार रात चोरबगान पंडाल में मची भगदड़ ने उनकी खुशियां छीन लीं। हादसे में अभिषेक और उनके मासूम बेटे अयांश की मौत हो गई।
पत्नी निभा को बेटे की मौत की जानकारी दे दी गई है, लेकिन पति के निधन की बात फिलहाल उनसे छिपाई गई है। उन्हें वापस बिहार भेज दिया गया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के दूसरे सदस्य कोलकाता पहुंचे। उन्होंने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पहले से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाए गए होते, तो शायद इस हादसे को रोका जा सकता था।
पत्नी को आंखों के सामने खो दिया, बचाने में नाकाम रहा पति
नदिया जिले के चकदाह निवासी राम सरकार अपनी पत्नी आरती सरकार विश्वास के साथ दुर्गा पूजा देखने पहुंचे थे। दोनों साथ में पंडाल घूम रहे थे, लेकिन भगदड़ के दौरान आरती की जान चली गई।
राम सरकार के मुताबिक, पंडाल में काफी भीड़ थी। अचानक सीटी बजाकर लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा गया। इसके बाद एक साथ बड़ी संख्या में लोग बाहर जाने लगे और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इसी दौरान आरती भीड़ के दबाव में जमीन पर गिर गईं। शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण वह दोबारा उठ नहीं सकीं।
पत्नी को अपनी आंखों के सामने खोने वाले राम सरकार सदमे में हैं। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा, “मैं उसे बचा नहीं सका।”
साथ में साड़ी पहनकर निकलीं, एक साथ दुनिया को कहा अलविदा
न्यू टाउन के गौरांगनगर की रहने वाली 17 वर्षीय तानिया विश्वास और वर्णली हलदर गहरी सहेलियां थीं। दोनों ने महासप्तमी के दिन साड़ी पहनकर साथ में दुर्गा पूजा घूमने की योजना बनाई थी।
शनिवार शाम दोनों तैयार होकर चोरबगान पूजा पंडाल पहुंचीं। लेकिन वहां मची भगदड़ में दोनों किशोरियों की कुचलकर मौत हो गई। जिन सहेलियों ने साथ में पूजा देखने का सपना संजोया था, उनकी मौत ने परिवार और परिचितों को गहरे सदमे में डाल दिया।
कैंसर अस्पताल में नर्स थीं श्रीपर्णा, दूसरों की मदद के लिए रहती थीं आगे
हुगली जिले के बैद्यबाटी की रहने वाली 27 वर्षीय श्रीपर्णा पोद्दार टाटा कैंसर अस्पताल में नर्स थीं। शनिवार सुबह वह ड्यूटी पर गई थीं। काम खत्म करने के बाद दोस्तों के साथ दुर्गा पूजा देखने चोरबगान पहुंचीं, लेकिन वहां हुई भगदड़ में उनकी मौत हो गई।
श्रीपर्णा अपने माता-पिता की इकलौती संतान थीं। उनके पड़ोसी हरिदास चटर्जी के मुताबिक, वह मिलनसार स्वभाव की थीं और मोहल्ले में किसी के बीमार होने पर मदद के लिए सबसे पहले पहुंचती थीं। उनकी मौत की खबर से पूरा इलाका स्तब्ध है।
माता-पिता का हाथ पकड़कर आया था प्रांजल, भीड़ में बिछड़ गया
आगरपाड़ा का रहने वाला 13 वर्षीय प्रांजल सरकार अपने माता-पिता के साथ दुर्गा पूजा देखने आया था। वह पंडाल में माता-पिता का हाथ पकड़कर घूम रहा था, लेकिन अचानक बढ़ी भीड़ में उनसे बिछड़ गया। बाद में उसका शव मिला।
प्रांजल के मामा ने बताया कि घटनास्थल पर कई शव एक साथ रखे हुए थे। उन्होंने अपने भांजे को जिस हालत में देखा, उसे बयां करना भी मुश्किल है। भीड़ में कुचलने से उसके चेहरे पर गंभीर चोटें आई थीं। बेटे को खोने के बाद उसकी मां बदहवास हैं और परिवार को अब भी इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा है।
बेटी की मौत से टूट गए दर्जी पिता
न्यू बैरकपुर की रहने वाली 19 वर्षीय कॉलेज छात्रा प्रिया समाद्दार भी दोस्तों के साथ दुर्गा पूजा देखने गई थीं। भगदड़ में उनकी मौत हो गई। प्रिया के पिता श्यामल समाद्दार दर्जी का काम करते हैं। बेटी को खोने के बाद वह गहरे सदमे में हैं। उनका कहना है कि उनका परिवार हंसता-खेलता था, लेकिन एक हादसे ने सबकुछ छीन लिया।
परिवार की जिम्मेदारी संभालती थीं शुभम सोनकर
कोलकाता के बागमारी इलाके की रहने वाली 33 वर्षीय शुभम सोनकर भी इस हादसे की शिकार हो गईं। वह अपने माता-पिता और बहन के साथ पूजा देखने निकली थीं।
शुभम एक निजी कंपनी में काम करती थीं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनके पिता रामजी सोनकर सेवानिवृत्त हैं, जबकि भाई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है और बहन ट्यूशन पढ़ाती है। परिवार की आर्थिक स्थिति में शुभम की अहम भूमिका थी। उनकी मौत के बाद माता-पिता गहरे सदमे में हैं।
पूजा देखने गए बुजुर्ग दंपती की एक साथ मौत
बरानगर नगर पालिका क्षेत्र के एनके चटर्जी रोड निवासी 62 वर्षीय दिलीप घोष और उनकी 56 वर्षीय पत्नी दीपाली घोष भी साथ में दुर्गा पूजा देखने निकले थे। शनिवार रात करीब साढ़े नौ बजे उनके भतीजे मिलन घोष को फोन आया कि दोनों अस्पताल में भर्ती हैं।
सूचना मिलते ही मिलन मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां पहले उन्हें चाचा दिलीप की मौत की जानकारी मिली। कुछ देर बाद चाची दीपाली के निधन की खबर भी मिल गई। एक साथ पूजा देखने निकले दंपती की मौत से परिवार में मातम पसरा है।
पंडाल से बाहर निकलने का रास्ता था अंधेरे में
पानीहाटी के जॉय अपार्टमेंट निवासी कल्पना जाना अपने भतीजे और दोस्तों के साथ पूजा देखने गई थीं। भगदड़ में उनकी भी जान चली गई। परिजनों का कहना है कि पंडाल से बाहर निकलने वाला रास्ता पर्याप्त रोशनी वाला नहीं था। बारिश और अत्यधिक भीड़ के कारण लोगों को निकलने में परेशानी हुई। परिवार का आरोप है कि इन परिस्थितियों ने हादसे को और गंभीर बना दिया।
एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत, बेटी अस्पताल में भर्ती
हुगली जिले के बालिया में मायके आईं 37 वर्षीय टगर बेज अपने 14 वर्षीय बेटे संदीप बेज और 25 वर्षीय भाभी पियाली प्रमाणिक के साथ कोलकाता में दुर्गा पूजा देखने पहुंची थीं। परिवार ने रविवार को घर लौटने की योजना बनाई थी, लेकिन शनिवार रात की भगदड़ में टगर, उनके बेटे और भाभी की मौत हो गई।
इस हादसे में टगर की बेटी आगमनी बेज भी घायल हुई है। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
कई अन्य परिवारों में भी पसरा मातम
इस हादसे में श्यामपुकुर की मिठू मंडल, बाली की आकृति कुमारी, हावड़ा के विकास भट्टाचार्य और बांकराहाट की स्नेहा भंडारी की भी मौत हुई है।
दुर्गा पूजा के दौरान मां के दर्शन और उत्सव की खुशियां बांटने निकले इन लोगों के परिवार अब अपनों के लौटने का इंतजार नहीं कर सकते। किसी घर में पिता नहीं रहे तो किसी घर में मां, किसी परिवार ने अपना इकलौता सहारा खो दिया। चोरबगान पंडाल की यह भगदड़ कई परिवारों के लिए जिंदगी भर न भरने वाला जख्म छोड़ गई है।
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