
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। रक्षाबंधन के दिन रामानुजगंज स्थित जिला जेल का माहौल उस वक्त भावुक हो गया, जब बंदी भाइयों से मिलने पहुंचीं बहनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए जेल पहुंचती रहीं। इनमें कई बहनें दूर-दराज के इलाकों से अपने भाई की कलाई पर राखी सजाने आई थीं।
जेल की चारदीवारी के भीतर कुछ देर की मुलाकात में भाई-बहनों के बीच भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनके बेहतर भविष्य, सुखी जीवन और सलामती की कामना की।
दूर-दराज से आईं बहनें, भाई की कलाई पर बांधी राखी
रक्षाबंधन को लेकर सुबह से ही जिला जेल के बाहर बहनों की भीड़ जुटने लगी थी। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद बहनों को जेल के अंदर बंदी भाइयों से मिलने और राखी बांधने की अनुमति दी गई।

शंकरगढ़ से अपने भाई को राखी बांधने रामानुजगंज पहुंचीं ज्योति मिंज ने बताया कि जेल प्रशासन की ओर से अच्छी व्यवस्था की गई है। भाई से मिलकर उन्हें काफी अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना उनके लिए बेहद भावुक पल रहा।
राखी बांधते समय छलक पड़े आंसू
जेल में मुलाकात के दौरान कई बहनें अपने भाइयों को देखकर भावुक हो गईं। राखी बांधते समय किसी ने भाई की सलामती की कामना की तो किसी ने उसके बेहतर भविष्य के लिए प्रार्थना की।
जेल की सामान्य दिनचर्या से अलग रक्षाबंधन के मौके पर कुछ समय के लिए परिसर में भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट नजर आई। बहनों ने भाइयों से बातचीत की और परिवार का हाल भी साझा किया।
सुरक्षा के बीच चलता रहा राखी बांधने का सिलसिला
त्योहार को देखते हुए जिला जेल में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। रामानुजगंज थाना के साथ विजयनगर और वाड्रफनगर पुलिस चौकी से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। जेल परिसर के अंदर और बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, ताकि मुलाकात के दौरान व्यवस्था बनी रहे।

जिला जेल अधीक्षक बाल्मिकी ध्रुव ने बताया कि सुबह से ही बंदी भाइयों की बहनें जेल पहुंचकर उन्हें राखी बांध रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और रक्षाबंधन का कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है।
जब तक आती रहेंगी बहनें, मिलता रहेगा राखी बांधने का मौका
जेल अधीक्षक ने बताया कि रक्षाबंधन कार्यक्रम सुबह करीब 8.30 बजे शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि बंदियों की बहनें जब तक जेल पहुंचती रहेंगी, उन्हें राखी बांधने का अवसर दिया जाएगा। किसी भी बहन को निराश होकर वापस नहीं भेजा जाएगा।
रक्षाबंधन के इस मौके पर जेल की ऊंची दीवारों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच भाई-बहन के रिश्ते की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने त्योहार की भावनाओं को और गहरा कर दिया। कुछ मिनटों की मुलाकात में बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, बातचीत की और फिर नम आंखों से विदा हुईं।
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