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    Home»Offbeat»Bihar: कामाख्या में पूरी रात चलता रहा तंत्र साधना को सिद्ध करने का खेल
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    Bihar: कामाख्या में पूरी रात चलता रहा तंत्र साधना को सिद्ध करने का खेल

    Offbeat NewsBy Offbeat NewsOctober 22, 2023
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    बेगूसराय, (हि.स.)। देश दुनिया में लोग जानते हैं कि आसाम का कामाख्या शक्तिपीठ तंत्र साधकों का सबसे बड़ा केंद्र है। लेकिन इसके बाद साधना की सिद्धि का सबसे बड़ा केंद्र बिहार का बखरी पुरानी दुर्गा स्थान है। यहां के शक्ति की चर्चा ही नहीं होती है, बल्कि हजारों लोग सिद्ध हो चुके हैं।

    अब एक बार फिर जागरण की पूरी रात यहां तंत्र साधकों का जमावड़ा लगा रहा। शनिवार रात भर दूर-दूर से आए साधक मां दुर्गा के सामने अपने तंत्र साधना को सिद्ध करने में जुटे रहे। इसको लेकर एक ओर आयोजन समिति को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं, इस साधना को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। हालांकि गुप्त तंत्र सिद्धि करने वाले साधकों ने पूरी पूजा श्मशान में की तथा अंतिम आहुति देने ही मंदिर पहुंचे।

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    उल्लेखनीय है कि शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की भक्ति का महापर्व शारदीय नवरात्रि में तंत्र साधना पौराणिक काल से चलता आ रहा है। नवरात्रि में सभी प्रकार के तंत्र-मंत्र साधक अपने साधना कि सिद्धि करते हैं। प्रख्यात साबर मंत्र साधिका बहुरा मामा की धरती और तंत्र साधकों के बीच बिहार के कामाख्या नाम से प्रसिद्ध बखरी में नवरात्र के पहले दिन से ही स्थानीय लोगों के अलावा बिहार के विभिन्न जिलों एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में तंत्र साधक जुटने लगते हैं।

    रात में सप्तमी पूजा के बाद तंत्र साधकों की विशेष पूजा शुरु होती है और सप्तमी की रात साधकों की भारी भीड़ जुट जाती है। विभिन्न राज्यों से आए सिद्धिकामी माता की पूजा-अर्चना के बाद साधना को सिद्धि में बदलने के लिए लीन रहते हैं। इनमें महिलाएं और जवान के अलावा बुढ़े लोग भी शामिल रहते हैं, जो वर्षों की तंत्र साधना को यहां सिद्धि में बदलने के लिए जमा होकर पूरी रात अपने अपने तंत्र साधना की सिद्धि करते हैं।

    सप्तमी की रात से मंदिर के आगे स्थित बलि स्थल पर विशेेष पूजा के बाद चाटी चलाया जाता है। जिसकी चाटी प्रतिमा तक पहुंच गई वह सिद्ध हो गया और ऐसा नहीं हुआ तो उसकी तंत्र साधना अधूरी रह गई। इतिहास कहता है कि मुगल काल में परमार वंश के राजाओं ने आकर इस मंदिर की स्थापना की थी। आज यहां योग पिशाचनि और कर्णमयी जैसी दुर्लभ तंत्र शक्तियों की साधना और सिद्धि होती है। बखरी के संबंध में मान्यता है की यहां कि बकरी और लकड़ी भी डायन हुआ करती थी।

    आधुनिक युग में भी तंत्र-मंत्र का आलम यह है की लोग इसमें गहरा विश्वास व्यक्त करते हैं और सिद्धि लिए आते हैं। बखरी की चर्चा बहुरा मामा नामक प्रसिद्ध तंत्र साधिका को लेकर होती है, जो कभी तंत्र साधना की बदौलत पेड़ के सहारे हवा में उड़ा करती थी, कार्यक्षेत्र बखरी से बंगाल तक था। अपने तंत्र साधना के सहारे देश भर के तांत्रिकों को परास्त करने वाली बहुरा मामा का वह चौघटिया इनार (कुआं) आज भी मौजूद है। जिससे होकर कभी चारों दिशा में जाने का रास्ता था।

    कहा जाता है कि इसी के माध्यम से बहुरा मामा सोने की नाव पर सवार होकर कुंआ से कमला के रास्ते अन्य जगहों पर जाया करती थी। बहुरा मामा के संबध में पुराने समय से कहा जाता है की सामंती ताकतों को खत्म करने के लिए उन्होंने तंत्र साधना की थी, जो बाद में इलाके की पहचान बन गई। बताया जाता है की उस जमाने में बहुरा मामा एक स्कूल चलाया करती थी जो देश भर में तंत्र साधकों का एक प्रमुख केन्द्र था।

    कौशल किशोर क्रांति बताते हैं कि ऐसी ही कई मान्यताओं के बीच बखरी प्रसिद्ध है। बहुरा मामा अपना जप, योग और यज्ञादि कार्य प्रसिद्ध ठूठी पाकड़ के तले करती थी। वह पाकड़ बहुरा मामा के इच्छानुसार वाहन एवं अन्य सिद्धि करने वाला था। ठूठी पाकड़ के पास ही चौघटिया इनार का विशाल जलागार था। ममतामयी मां एवं कर्मपक्ष पर दृढ़ रहने वाली साधिकाओं की गुरूआइन बहुरा आदिशक्ति दुर्गा की परम आराधिका, शाबर मंत्र सिद्ध प्रख्यात साधिका थी। उन्हीं के समय से बखरी चर्चित साधना स्थली है।

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