
वाराणसी/हजारीबाग। काशी में देशभर के विद्वानों और ज्योतिषाचार्यों की मौजूदगी में हजारीबाग के डॉ. संजय सिंह के नाम एक के बाद एक उपलब्धियां जुड़ती चली गईं। पहले उनके नाम को लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने की घोषणा हुई, फिर उन्हें प्रशस्ति-पत्र और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसके बाद एक ही सम्मेलन में उन्हें ज्योतिष के क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित उपाधियों से नवाजा गया।
बीएचयू में हुआ दो दिवसीय सम्मेलन
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के आयुर्वेदिक एवं ज्योतिष संकाय और काशी ज्योतिष संस्था के संयुक्त तत्वावधान में 1 और 2 सितंबर को बीएचयू के के.एन. उडुप्पा सभागार में ‘आयुर्ज्योतिष 2026’ सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के साथ नेपाल और विदेशों से भी ज्योतिषाचार्य, धर्मगुरु, आध्यात्मिक साधक और विषय विशेषज्ञ पहुंचे। सम्मेलन में 250 से अधिक विद्वानों और गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी रही।
सबसे पहले सामने आया रिकॉर्ड का सम्मान
सम्मेलन के दौरान डॉ. संजय सिंह के नाम को ज्योतिष, तंत्र, हीलिंग और गूढ़ विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए ‘लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किए जाने की घोषणा की गई। इसके बाद बीएचयू के सभागार में उन्हें प्रशस्ति-पत्र और स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। सम्मान मिलते ही सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया।
फिर मिलीं काशी की दो बड़ी उपाधियां
डॉ. संजय सिंह के सम्मान का सिलसिला यहीं नहीं रुका। सम्मेलन के दूसरे दिन उन्हें बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और काशी ज्योतिष संस्था की ओर से ‘काशी ज्योतिष आचार्य अवार्ड’ और ‘काशी ज्योतिष वाचस्पति अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
काशी को ज्योतिष, वेद-वेदांग और भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में इसी धरती पर इन उपाधियों से सम्मानित होना डॉ. संजय सिंह के लिए खास उपलब्धि रही।
एक और सम्मान ने बढ़ाया गौरव
इसके बाद विश्व वेद विद्यापीठम, बैंगलोर के कुलपति की ओर से डॉ. संजय सिंह को ‘ज्योतिष भारत भूषणम्’ की उपाधि से भी सम्मानित किया गया। यानी दो दिनों के सम्मेलन में उन्हें रिकॉर्ड सम्मान के साथ कई प्रतिष्ठित उपाधियां मिलीं।
हजारीबाग से काशी तक गूंजा नाम
काशी में देशभर से आए विद्वानों के बीच डॉ. संजय सिंह को मिले इन सम्मानों से हजारीबाग और झारखंड का नाम भी चर्चा में आया। अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के साथ एक ही सम्मेलन में कई उपाधियां मिलना उनके लिए यादगार उपलब्धि बन गई।
सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कई प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, धर्मगुरु, शिक्षाविद और आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े लोग मौजूद रहे। आयुर्ज्योतिष 2026 में भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिष और आध्यात्मिक चिंतन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
डॉ. संजय सिंह के सम्मान को सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया गया। काशी की विद्वत् परंपरा के बीच मिली यह पहचान हजारीबाग और झारखंड के लिए भी गौरव का विषय बनी।
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