
बलरामपुर। रामानुजगंज में झाड़फूंक, तंत्र-मंत्र और अवैध दवाओं के सहारे वर्षों से चल रहे अंधविश्वास के संगठित खेल पर जब मीडिया ने सवाल उठाए, तो तथाकथित ‘बाबा’ की घबराहट सामने आ गई। खबर प्रकाशित होते ही बाबा ने किसी कार्रवाई से पहले ही अपने अवैध ठिकाने को समेट लिया। यह घटनाक्रम साफ संकेत देता है कि अंधविश्वास का यह कारोबार पूरी तरह संगठित और सचेत तरीके से संचालित किया जा रहा था।

सूत्रों के अनुसार, खबर छपने के दूसरे ही दिन सुबह करीब चार बजे बाबा ने एक ट्रक मंगवाया और नगर के व्यस्तम मार्ग पर स्थित दुकान से आयुर्वेदिक व एलोपैथिक दवाओं का पूरा जखीरा हटवा दिया, जहां लंबे समय से अवैध तरीके से इलाज और दवाओं का भंडारण किया जा रहा था। सुबह होते-होते दुकान पूरी तरह खाली हो गई।
बताया जा रहा है कि, फिलहाल बाबा अब रामानुजगंज बस स्टैंड के पास स्थित एक निजी दुकान में बैठता है और हालात पर नजर बनाए हुए है। उसके सहयोगी ही परिचितों और मरीजों को नए ठिकाने की जानकारी दे रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
रिपोर्टर को लेकर भी बौखलाहट
खबर के सामने आने के बाद बाबा इतना बौखला गया कि उसने रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले रिपोर्टर के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश की। सूत्रों के अनुसार, उसने अपने कई करीबियों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास किया कि आखिर यह खबर किसने और कैसे प्रकाशित की।
उल्लेखनीय है कि, नगर के व्यस्तम मार्ग पर सक्रिय पांचवीं फेल यह स्वयंभू बाबा झाड़फूंक, आयुर्वेद और एलोपैथी तीनों पद्धतियों से इलाज करने का दावा करता रहा है। न उसके पास कोई चिकित्सकीय डिग्री है और न ही दवाओं के भंडारण अथवा बिक्री का कोई वैधानिक लाइसेंस। इसके बावजूद अंधविश्वास का यह कारोबार वर्षों तक फलता-फूलता रहा।
इस पूरे मामले पर एसडीएम आनंदराम नेताम ने कहा कि नगर में सक्रिय ऐसे सभी बाबाओं पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि झाड़फूंक और अवैध इलाज करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रामानुजगंज जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह का अंधविश्वास न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। बाबा चाहे जहां भी नया ठिकाना बनाएगा, वहां की गतिविधियों से जुड़ी खबर प्रकाशित की जाती रहेगी। अंधविश्वास के इस संगठित खेल पर अब पर्दा डालना संभव नहीं है।
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