
चतरा/रांची। झारखंड के चतरा जिले से सोमवार रात एक हृदयविदारक हादसे की खबर सामने आई। रांची से दिल्ली के लिए रवाना हुई रेडबर्ड एयरवेज प्रा. लि. की एयर एंबुलेंस सिमरिया थाना क्षेत्र के कसियातु जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार, एयर एंबुलेंस ने रात में रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। उड़ान के कुछ ही देर बाद कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क टूट गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर को तत्काल सक्रिय किया गया। देर रात तक चले राहत एवं खोज अभियान के बाद दुर्घटनास्थल का पता लगाया गया।
विमान में दो पायलट कैप्टन विवेक और कैप्टन सबराजदीप, गंभीर रूप से झुलसे मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी, भगीना ध्रुव कुमार, डॉ. विकास कुमार गुप्ता और पैरामेडिक सचिन कुमार मिश्रा सवार थे। चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल ने बताया कि सभी शव बरामद कर लिए गए हैं और आगे की प्रक्रिया जारी है।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय मौसम अचानक खराब हो गया था। शाम होते-होते तेज हवा और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई थी। आशंका जताई जा रही है कि प्रतिकूल मौसम के कारण विमान अपने निर्धारित मार्ग से भटक गया और दाईं ओर डायवर्ट हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि रात के सन्नाटे में जंगल की दिशा से जोरदार धमाके की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।
मृतक संजय कुमार चंदवा के निवासी और व्यवसायी थे। छह दिन पहले उनके लाइन होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी, जिसमें वे करीब 65 प्रतिशत तक झुलस गए थे। उन्हें रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत नाजुक होने पर बेहतर इलाज के लिए दिल्ली रेफर किया गया था। संजय अपने पीछे दो बेटे—शुभम (17) और शिवम (13) छोड़ गए हैं।
परिजनों ने एयर एंबुलेंस के किराए को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी को पहले ही आठ लाख रुपये दिए जा चुके थे, जबकि 2.50 लाख रुपये शेष थे। आरोप है कि बकाया राशि के भुगतान के बिना उड़ान भरने से इनकार कर दिया गया था। इसके बाद परिजन चंदवा लौटे, अतिरिक्त राशि की व्यवस्था की और शेष भुगतान करने के बाद ही विमान ने उड़ान भरी।
हादसे ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच के संकेत दिए हैं। खराब मौसम को फिलहाल संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी।
यह दुर्घटना न केवल सात जिंदगियों के असमय अंत का प्रतीक है, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
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