
रांची, एजेंसी। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी सीजीएल समेत प्रतियोगी परीक्षाओं की नियुक्तियां रद्द किए जाने के फैसले से प्रभावित कर्मचारियों और अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। हाई कोर्ट के स्थगन आदेश के बाद प्रभावित युवाओं को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत से हासिल नौकरी अचानक छिन जाने से उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि वे परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने गलत तरीके से नौकरी हासिल की है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन निष्पक्ष तरीके से चयनित अभ्यर्थियों को उसकी सजा नहीं दी जानी चाहिए।
‘सरकार जांच करे, लेकिन नौकरी एकतरफा न छीने’
प्रदर्शनकारी युवाओं ने सरकार से पूरे मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की मांग की। उनका कहना है कि प्रत्येक अभ्यर्थी की भूमिका और चयन की अलग-अलग जांच की जा सकती है। इसके बाद यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
नम्रता महतो ने बताया कि वह किसान परिवार और अपने गांव की पहली लड़की थीं, जिन्हें अधिकारी बनने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने के महज डेढ़ महीने बाद ही उसे खोने की स्थिति बन गई और पहला वेतन भी नहीं मिल सका। उन्होंने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि मेहनत से चयनित अभ्यर्थियों के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है।
डिफेंस की नौकरी छोड़कर की तैयारी, अब भविष्य पर सवाल
गौरव राय ने बताया कि वह किसान परिवार से आते हैं और झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी के लिए उन्होंने डिफेंस की नौकरी तक छोड़ दी थी। वर्ष 2023 में परीक्षा पास करने के बाद फरवरी 2026 में उन्होंने फूड सप्लाई ऑफिसर के पद पर योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार उनकी पात्रता और चयन की जांच कर सकती है, लेकिन बिना किसी व्यक्तिगत जांच के नौकरी समाप्त करना उचित नहीं है।
‘नौकरी गई तो परिवार पर पड़ेगा सीधा असर’
अनुप कुमार ने बताया कि वह निजी काम करते हुए सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे। वर्ष 2024 की परीक्षा में शामिल होने के बाद 2026 में परिणाम आया और जून में उन्होंने नौकरी ज्वाइन की थी। अब अचानक नौकरी जाने की स्थिति बनने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा होने की चिंता है।
अविनाश कुमार ने कहा कि लंबे आर्थिक संघर्ष के बाद उन्हें फूड सेफ्टी ऑफिसर की नौकरी मिली थी। नौकरी चली गई तो वह दोबारा बेरोजगारी की स्थिति में पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन मेहनत और योग्यता के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य की भी चिंता सरकार को करनी चाहिए।
हाई कोर्ट के आदेश से जगी उम्मीद
प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि हाई कोर्ट के स्थगन आदेश से उन्हें फिलहाल राहत और आगे न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने सरकार से नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार करने और वास्तविक रूप से चयनित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की मांग की है।
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