
पलामू। जिले के चैनपुर प्रखंड के रामपुर गोलीकांड में हुई सिकंदर चौधरी की हत्या मामले में कथित प्रशासनिक विफलता के खिलाफ सोमवार को समाहरणालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया गया। विकासशील इंसाफ पार्टी पलामू प्रमंडल के तत्वावधान में आयोजित इस आन्दोलन में मुख्य अतिथि के तौर पर वीआइपी पार्टी के सुप्रीमो सह बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी उपस्थित थे। उनके अलावा वीआइपी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष प्रो राजकुमार चौधरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणाों ने भागीदारी सुनिश्चित की।
धरना के माध्यम से रामपुर हत्याकांड में प्रशासनिक विफलता की उच्चस्तरीय जांच, शेष 14 नामजद अभियुक्तों की अविलंब गिरफ्तारी, अनुसंधान में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, दोषी पुलिस पदाधिकारियों पर कठोर कार्रवाई, पीड़ित परिवार का पुर्नवास और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की मांग की गयी। धरना के बाद मुख्यमंत्री के नाम 10 सूत्री मांग पत्र उपायुक्त को सौंपा गया।
उल्लेखनीय है कि 23 मई 2026 को रामपुर में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीचहिंसक झड़प हुई थी और इस क्रम में गोली चलने से एक पक्ष के सिकंदर चौधरी की मौत हो गयी थी और तीन लोग जख्मी हुए थे।
धरना से पहले शिवाजी मैदान में लोगों का जुटान हुआ और वहां से सभी जुलूस निकाल कर समाहरणालय पहुंचे। जिला परिषद कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया गया।
मौके पर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने कहा कि न्याय और अधिकार के लिए लगातार संघर्ष करना होगा। समाज के लोगों को राजनीति में भी भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत है। खुद और अपने समाज के लिए जगने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आज हमारे समाज के लोगों को गाजर-मूली की तरह हत्या की जा रही है। फर्जी एनकाउंटर में मारा जा रहा है। यह धरना प्रर्शदन न्याय और कार्रवाई के लिए है। सिकंदर चौधरी की निर्मम हत्या कर दी गयी। कई लोगों को गोली लगी, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई और सरकारी मुआवजा संतोषजनक नहीं है। अनुसंधान में अनियमितता बरती गयी है, वहीं आरोपितों को पकड़ने में पुलिस सुस्ती दिखा रही है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि घटना के काफी समय बीत जाने के बाद भी सिकंदर के हत्यारे पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, जिससे पीड़ित परिवार और प्रत्यक्षदर्शी गवाह, भय और असुरक्षा के वातावरण में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। यह स्थिति कानून व्यवस्था और अनुसंधान की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न चिन्ह खड़ा करती है। अनुसंधान रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के मूल बयानों को उनके वास्तिवक स्वरूप में दर्ज करने के बजाय उन्हें परिवर्तित एवं तोड़मड़ोड़ कर अंकित कर अप्रत्यक्ष साक्षी के रूप में प्रदर्शित कर दिया गया है।
ज्ञापन के माध्यम से 14 नामजद अभियुक्तों को जल्द गिरफ्तारी, घटना रोकने में हुई प्रशासनिक विफलता की उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई, अनुसंधान में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र एजेंसी एसआइटी के माध्यम से जांच कराने, पीड़ित परिवार को 40 लाख रूपए की सहायता, एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी, समुचित सुरक्षा सहित 10 मांग शामिल हैं।
धरना प्रदर्शन के बाद पूर्व मंत्री मुकेश सहनी एसपी कपिल चौधरी से मिले और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के मामले में थाना प्रभारी एवं केश के अनुसंधानकर्ता की भूमिका पर सवाल उठाया। कहा कि सिकंदर चौधरी हत्याकांड और अन्य लोगों को गोली लगने की घटना में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने पुलिस के अनुसंधान रिपोर्ट पर सवाल उठाया।
कहा कि दोनों पदाधिकारी सही से इस दिशा में कार्य नहीं कर पा रहे हैं। मामले में न्याय की मांग की गयी। मुकेश सहनी के अनुसार एसपी ने उन्हें आश्वासन दिया कि 15 दिनों में निष्पक्ष एवं उचित कार्रवाई होगी। मुकेश ने कहा कि दोषी बचे नहीं और निर्दोष फंसे नहीं, की तर्ज पर कार्रवाई करने की जरूरत है, ताकि समाज में अपराध करने वालों के बीच मैसेज जाए और दोबारा से ऐसी घटना न हो। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जायेगा। हमें सरकार पर प्रशासन पर भरोसा है।
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