
हजारीबाग। दिल्ली से पधारे चेयर प्रोफेसर, इग्नू के इतिहास विभाग के पूर्व निदेशक सह इतिहासविद कपिल कुमार ने सोमवार को विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के इतिहास विभाग में व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने “भारत का विभाजन: वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी प्रासंगिकता” विषय पर प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत विभाजन और उससे पूर्व व बाद के कई अनछुए पहलुओं से विद्यार्थियों और वहां मौजूद शिक्षकों को अवगत कराया। उन्होंने जाति-धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद का संदेश दिया। साथ ही कहा कि हमारे देश की भौगोलिक सीमाएं और संविधान की सुरक्षा भी स्वतंत्रता है।
उन्होंने गांधीवाद को परिभाषित किया कि मानसिक रूप से हिंसात्मक विचारधारा शब्द, व्यवहार और सोच से हटानी होगी। उन्होंने गाजा-इजराइल और बांग्लादेश की वर्तमान परिस्थितियों पर भी अपने विचार रखे और कहा कि ऐसी परिस्थितियां नहीं चाहिए। हमें उन मुसलमानों के बारे में मदरसों में बच्चों को तालीम देनी चाहिए, जो राष्ट्रवादी थे और भारत की आजादी के लिए बलिदान दिया। उन्होंने जिन्ना को नेहरू से अधिक राष्ट्रवादी बताया। साथ ही कहा कि तब वंदे मातरम के गीत पूरे गाए जाते थे। प्रोफेसर कपिल कुमार ने आजाद हिंद फौज से जुड़ी गाथाओं का वर्णन किया और कांग्रेस की कार्यशैली भी बताई।
पीएम उषा अंतर्गत विभावि में ‘मेरू’ के तहत इतिहास विभाग में आयोजित व्याख्यान में इतिहासविद् प्रोफेसर कपिल कुमार ने लाॅर्ड माउंटबेटन की गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला और गांधी, नेहरू, बोस, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, जयप्रकाश नारायण समेत विभिन्न नेताओं और क्रांतिकारियों का जिक्र करते हुए उनकी भूमिका का वर्णन किया। उन्होंने भारत-चीन की लड़ाई पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बनने से भी मुसलमानों को क्या हासिल हुआ। यह भी कहा कि पं. जवाहरलाल नेहरू तो बंगाल को अलग राष्ट्र बनाने की शर्त भी मान ली थी। वह तै श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल को भारत से जैड़े रखने में अहम भूमिका निभाई थी।
अंग्रेज तो भारत के पांच टुकड़े करवाना चाहता था। उन्होंने यह कहकर चौंकाया कि नेताजी सुभाष चंद्र बैस की मोती प्लेन क्रैश में नहीं हुई थी। प्रोफेसर कपिल कुमार ने कहा कि जाति-धर्म से ऊपर उठकर ही हम राष्ट्रवाद की परिकल्पना को साकार कर सकते हैं।
उन्होंने प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शोधार्थियों की जिज्ञासा को भी शांत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा ने की। मौके पर छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डाॅ विकास कुमार, संत कोलंबा काॅलेज इतिहास के प्रोफेसर डाॅ शत्रुघ्न पांडेय, पूर्व रजिस्ट्रार डाॅ बंशीधर रूखैय्यार आदि मौजूद थे। विभाजित में पीजी इतिहास के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डाॅ हितेंद्र अनुपम ने मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन किया।
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