
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। जिले में फरवरी के अंतिम सप्ताह में हुई बारिश ने मौसम का मिजाज अचानक बदल दिया है। कुछ दिन पहले तक जहां दिन में हल्की गर्माहट महसूस की जा रही थी, वहीं अब फिर से ठंड ने दस्तक दे दी है। बारिश के बाद अधिकतम तापमान में लगभग 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जनजीवन पर सीधा असर पड़ा है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बारिश से पहले जिले का अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास था। वर्षा के बाद अधिकतम तापमान घटकर 22 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में आई गिरावट के चलते लोगों ने एक बार फिर ऊनी कपड़े निकाल लिए हैं और सुबह-शाम ठंड का अहसास बढ़ गया है।
जिले के लगभग छह विकासखंडों में हुई वर्षा का असर सरहदी क्षेत्र रामानुजगंज में भी देखने को मिल सकता है। जीवनदायिनी कन्हर नदी, जो प्रायः मार्च आते-आते सूखने लगती है, उसमें जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यदि एनीकट के गेट इस बार सही ढंग से कार्य करते हैं और पानी रोका जा सका, तो गर्मी के मौसम में रामानुजगंज नगर पालिका क्षेत्र के करीब 20 हजार लोगों को संभावित जल संकट से राहत मिल सकती है। उल्लेखनीय है कि पूर्व वर्षों में एनीकट के गेट खराब होने से नदी का जलस्तर तेजी से घट जाता था। पिछले वर्ष जल संसाधन विभाग की सक्रियता और पर्याप्त वर्षा के कारण कन्हर में पानी संरक्षित रह पाया था। इस बार भी असमय हुई बारिश से नदी के जलस्तर में वृद्धि की उम्मीद है।

वहीं वाड्रफनगर विकासखंड में सोमवार शाम मूसलाधार बारिश के साथ ओलावृष्टि भी हुई। कई स्थानों पर ओलों की मोटी परत जमने से सड़कें सफेद चादर सी नजर आने लगीं। अचानक बदले मौसम ने किसानों और आमजन दोनों को प्रभावित किया है। खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।
मौसम वैज्ञानिक एच.पी. चंद्रा के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चिन्हित निम्न दबाव का क्षेत्र सक्रिय है। इसके साथ ऊपरी हवा का चक्रीय परिसंचरण लगभग 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक विस्तारित है। यह तंत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए बाद में मुड़कर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर अग्रसर हो सकता है तथा अगले 48 घंटों में पुनः दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी की ओर जाने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त एक द्रोणिका दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी स्थित निम्न दबाव क्षेत्र से दक्षिण मध्य महाराष्ट्र तक लगभग 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई तक विस्तारित है। इसी तंत्र के प्रभाव से प्रदेश के मौसम में बदलाव देखा जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार 23 फरवरी को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा की संभावना है, जिसका मुख्य प्रभाव बस्तर संभाग के जिलों में पड़ सकता है। 24 फरवरी से न्यूनतम तापमान में अगले दो दिनों तक 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट होने की संभावना जताई गई है, जबकि अधिकतम तापमान में विशेष परिवर्तन की संभावना नहीं है।

फिलहाल मौसम के इस अप्रत्याशित बदलाव ने एक बार फिर सर्दी का अहसास करा दिया है। बदलते तापमान और वर्षा के प्रभाव से आमजन की दिनचर्या में भी हल्का परिवर्तन देखा जा रहा है, वहीं किसानों की नजर अब आसमान पर टिकी हुई है।
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