
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। उत्तरी छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड की वापसी ने जनजीवन को एक बार फिर अस्त-व्यस्त कर दिया है। बलरामपुर जिले सहित आसपास के इलाकों में शीतलहर और घने कोहरे के चलते हालात बेहद मुश्किल हो गए हैं। खासकर स्कूली बच्चों को सुबह के समय कड़ाके की ठंड और शून्य के करीब विजिबिलिटी में घर से निकलने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है।
जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। तीसरे सप्ताह में ठंड के असर में कमी महसूस की जा रही थी, लेकिन चौथे सप्ताह की शुरुआत के साथ ही शीतलहर और कोहरे ने फिर से ठिठुरन बढ़ा दी है। बलरामपुर जिले में सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने से दृश्यता लगभग शून्य हो जा रही है, जिससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है बल्कि स्कूली बच्चों की दिनचर्या भी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।
कड़ाके की ठंड में छोटे बच्चे सुबह-सुबह स्कूल जाने को मजबूर हैं। ठंड से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने और प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की राहत या समय में बदलाव नहीं किए जाने से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। लगातार ठंड और कोहरे के कारण बच्चों के बीमार पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।

घने कोहरे के चलते सड़कों पर वाहन चालकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर दृश्यता बेहद कम होने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है, जिसका सीधा असर स्कूली बसों और निजी वाहनों से आने-जाने वाले बच्चों पर पड़ रहा है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार उत्तर छत्तीसगढ़ के इलाकों में आगामी तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने की संभावना है। इसका असर विशेष रूप से रात और सुबह के समय अधिक महसूस किया जाएगा। बढ़ती ठंड को देखते हुए लोगों को एक बार फिर गर्म कपड़ों का सहारा लेना पड़ सकता है, वहीं स्कूली बच्चों को ठंड से बचाने के लिए एहतियात बरतना बेहद जरूरी हो गया है।
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