
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से सामने आए एक वायरल वीडियो ने प्रशासनिक और पुलिस तंत्र को कठघरे में ला खड़ा किया है। ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम में कथित आपत्तिजनक प्रस्तुतियों और अधिकारियों की मौजूदगी के आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कार्रवाई के दायरे में जहां एक SDM को पद से हटाया गया है, वहीं आयोजन से जुड़े लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा गया है।
गरियाबंद जिले के उरमाल क्षेत्र में आयोजित ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। वीडियो में मंच पर मर्यादा के विपरीत प्रस्तुतियों का दावा किया गया है, वहीं कार्यक्रम के दौरान कुछ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।
मामले के सामने आते ही गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तत्कालीन SDM तुलसी दास मरकाम को उनके पद से हटा दिया। इसके साथ ही SDM की भूमिका की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की गई है, जिसकी कार्यवाही शुरू हो चुकी है।
आयोजन समिति पर कार्रवाई
पुलिस जांच के बाद आयोजन समिति के 14 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इन पर कार्यक्रम के दौरान नियमों और शर्तों के उल्लंघन, सार्वजनिक मर्यादा भंग करने और अनुमति की शर्तों से अलग गतिविधियों के आरोप लगाए गए हैं। इससे पहले शिकायत के आधार पर कुछ आयोजकों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था, लेकिन वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई तेज की गई।
पुलिसकर्मियों पर भी गिरी गाज
इस प्रकरण में पुलिस महकमे पर भी सवाल उठे हैं। पहले ही गरियाबंद पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर्य ने कार्यक्रम से जुड़े वीडियो में दिखाई देने वाले कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। देवभोग थाने में पदस्थ एक प्रधान आरक्षक और दो आरक्षकों को निलंबन की कार्रवाई झेलनी पड़ी।
बाल संरक्षण आयोग की एंट्री
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाल संरक्षण आयोग ने भी हस्तक्षेप किया है। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि यह जांच की जाए कि कार्यक्रम स्थल पर किसी नाबालिग की मौजूदगी तो नहीं थी और इस संबंध में 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, उरमाल में एक युवा समिति ने छह दिवसीय ऑर्केस्ट्रा आयोजन की अनुमति ली थी। अनुमति मनोरंजन कार्यक्रम के नाम पर दी गई थी, लेकिन आरोप है कि आयोजन के दौरान तय मानकों और शर्तों का उल्लंघन किया गया। कार्यक्रम के लिए बाहरी राज्यों से कलाकार बुलाए गए थे और कई दिनों तक आयोजन चला।
वायरल वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। अब पूरे मामले की परत-दर-परत जांच की जा रही है। जिला प्रशासन का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सार्वजनिक आयोजनों में नियमों के पालन को लेकर भी एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है।
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