
बलरामपुर। झारखंड और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला कन्हर एनीकट इन दिनों सुरक्षा नहीं, बल्कि लापरवाही की तस्वीर बन गया है। एनीकट पर साप्ताहिक बाजार सजने से भारी भीड़ उमड़ रही है। पानी भले कम हो, लेकिन फिसलन और नुकीली चट्टानें हर कदम पर खतरे का संकेत दे रही हैं। जरा सा संतुलन बिगड़ा और गंभीर हादसा तय है।
कन्हर नदी पर बना एनीकट, जो झारखंड के एक हिस्से को छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज से जोड़ता है, इस बार साप्ताहिक बाजार का अघोषित ठिकाना बन गया है। एनीकट की संकरी सतह पर दोनों ओर व्यापारी कपड़े, घरेलू सामान और रोजमर्रा की जरूरतों की दुकानें लगाए बैठे हैं। खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ के बीच बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की आवाजाही जोखिम भरी हो चुकी है।
एनीकट की सतह पर जगह-जगह फिसलन है, किनारों पर नुकीली चट्टानें साफ दिखाई देती हैं। हल्की सी चूक किसी को भी नीचे गिरा सकती है, जिससे गंभीर चोट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बाजार पहले किनारे लगता था, लेकिन अब सीधे एनीकट पर सजा दिया गया है, जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया है।

उल्लेखनीय है कि जल संसाधन विभाग ने पहले एनीकट के गेट पर ताला लगाकर आवाजाही रोकने का प्रयास किया था, लेकिन असामाजिक तत्वों ने गेट को ही तोड़ दिया। इसके बाद से एनीकट पर न केवल आवागमन बढ़ा, बल्कि बाजार लगना भी शुरू हो गया।
दो राज्यों की सीमा होने के कारण जिम्मेदारी तय करने में भी ढिलाई दिखाई दे रही है। न तो सुरक्षा घेराबंदी है, न चेतावनी संकेत और न ही किसी प्रकार की निगरानी। यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो कन्हर एनीकट पर बाजार किसी बड़े हादसे की पटकथा लिख सकता है। अब सवाल यह है कि चेतावनी के बाद भी क्या प्रशासन जागेगा, या किसी अप्रिय घटना के बाद ही कार्रवाई होगी?
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