
रायगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में कोयला खनन विरोध ने शनिवार को कानून व्यवस्था की सीमाएं तोड़ दीं। JPL कोयला खदान के खिलाफ चल रहे धरने के दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस पर संगठित हमला कर दिया। भीड़ ने महिला थाना प्रभारी को लात-घूंसे मारे, जिससे वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। हालात इस कदर बिगड़े कि पुलिस की गाड़ियां और एम्बुलेंस तक आग के हवाले कर दी गईं। यह विरोध नहीं, बल्कि प्रशासन के खिलाफ खुला हिंसक विद्रोह बन गया।
तमनार थाना क्षेत्र में JPL कोल ब्लॉक के विरोध में जारी धरना अचानक हिंसक हो गया। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस पर उग्र भीड़ ने पथराव और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस दौरान महिलाओं की भीड़ ने तमनार थाना प्रभारी कमला पुषाम पर लात-घूंसे से हमला किया। गंभीर चोट लगने से वह मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़ीं।
हमले में SDOP अनिल विश्वकर्मा समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। महिला आरक्षकों को भी चोटें आई हैं। घायलों को तत्काल स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों को रायगढ़ रेफर किया गया है।
धरना, तनाव और फिर हिंसा
प्रशासन के अनुसार, 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में आयोजित जनसुनवाई के विरोध में JPL कोयला खदान सेक्टर-1 से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। शनिवार सुबह करीब 9 बजे लगभग 300 ग्रामीण लिबरा चौक पर जमा हो गए और सड़क पर बैठकर आवागमन रोक दिया।
स्थिति को संभालने सुबह करीब 10 बजे अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। समझाइश के बाद लोगों को टेंट वाले धरना स्थल पर भेज दिया गया। कुछ समय के लिए शांति रही, लेकिन तनाव बना रहा।
भीड़ बढ़ी, बैरिकेड टूटे
जिला प्रशासन के मुताबिक आसपास के गांवों से और लोग पहुंचने लगे। दोपहर तक भीड़ की संख्या करीब 1000 के आसपास पहुंच गई। घरघोड़ा के एसडीएम और पुलिस अधिकारी लगातार माइक से शांति बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ बार-बार सड़क पर आकर जाम करने की कोशिश करती रही।
करीब दोपहर ढाई बजे अचानक हालात बेकाबू हो गए। उग्र भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और पत्थर व डंडों से हमला शुरू कर दिया। पुलिस पर जमकर पथराव हुआ, कई जवानों को अपनी जान बचाकर पीछे हटना पड़ा।

सरकारी वाहनों में आग, प्लांट पर हमला
हिंसा के दौरान भीड़ ने मौके पर खड़ी पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस को आग के हवाले कर दिया। कई अन्य सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद उग्र भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट की ओर बढ़ गई, जहां कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आग लगा दी गई। प्लांट कार्यालय में भी तोड़फोड़ की गई।
अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव
स्थिति संभालने खुद रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक और लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार मौके पर पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद भीड़ और उग्र हो गई। अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव जारी रहा और भीड़ दोबारा प्लांट की ओर जाकर आगजनी करती रही।
प्रशासन सख्त, कार्रवाई तय
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि धरना पिछले 15 दिनों से शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन दोपहर में कुछ असामाजिक तत्वों ने भीड़ को भड़काया, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हमला और सरकारी संपत्ति को नुकसान गंभीर अपराध है।
फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हालात काबू में बताए जा रहे हैं। पुलिस हिंसा में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। प्रशासन ने साफ किया है कि पुलिस पर हमला करने और आगजनी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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