
रांची। झारखंड में सामने आए कथित 750 करोड़ रुपए के शराब घोटाले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विपक्ष ने इस मामले में जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की है, जिससे पूरे प्रकरण ने गंभीर मोड़ ले लिया है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर शराब घोटाले की जांच पर चिंता जताई है। उन्होंने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एजेंसी निष्पक्ष जांच करने में विफल रही है और मामले को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
मरांडी ने कहा कि इतने बड़े आर्थिक घोटाले में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं होना कई तरह के संदेह पैदा करता है। उनके अनुसार, वर्ष 2022 में उत्पाद नीति में बदलाव के जरिए एक खास सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया, जिससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती तौर पर 38 करोड़ रुपए का मामला अब बढ़कर 750 करोड़ रुपए से अधिक का हो चुका है।

चार्जशीट में देरी पर उठे सवाल
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मई 2025 में ACB द्वारा कई अधिकारियों और संबंधित लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद तय समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई। इसका सीधा लाभ आरोपियों को मिला और अधिकांश को डिफॉल्ट बेल मिल गई। मरांडी के मुताबिक यह देरी सामान्य नहीं बल्कि सुनियोजित प्रतीत होती है।
फरारी ने बढ़ाई जांच पर शंका
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब छत्तीसगढ़ के कारोबारी नवीन केडिया गिरफ्तारी के बाद फरार हो गया। गोवा से गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट बेल मिली और वह पुलिस की निगरानी से निकल गया। इस घटना को मरांडी ने जांच एजेंसी की गंभीर चूक बताया।
उन्होंने कहा कि 17 में से 14 आरोपियों का जमानत पर बाहर आना यह दर्शाता है कि जांच प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ रही है, जिससे पूरे मामले की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें। उन्होंने ACB को जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने के निर्देश देने और पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश करने की मांग की है।
मरांडी ने कहा कि यह मामला सिर्फ आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की पारदर्शिता और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो जनता का भरोसा तंत्र से उठ सकता है।
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