नई दिल्ली। Muskan Rastogi Death Sentence: उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को अदालत ने मृत्युदंड सुनाया है। दोनों को मुस्कान के पति और मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या का दोषी पाया गया है। 14 अक्टूबर 2026 को मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने करीब 13 महीने तक चली सुनवाई और 126 तारीखों के बाद दोनों को सजा-ए-मौत सुनाई। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान पेश किए गए थे।
इस फैसले के बाद एक बार फिर देश में मृत्युदंड और उसे लागू करने की प्रक्रिया को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। यदि आगे की सभी न्यायिक प्रक्रियाओं के बाद मुस्कान की सजा बरकरार रहती है और उस पर अमल होता है, तो वह आजाद भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला होगी। इससे पहले अमरोहा की शबनम को भी अपने परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में मृत्युदंड सुनाया गया था, लेकिन उसे फांसी नहीं दी गई।
इस पूरे मामले में बिहार की बक्सर जेल, वहां तैयार होने वाली विशेष रस्सी और मेरठ के तीसरी पीढ़ी के जल्लाद पवन का नाम भी महत्वपूर्ण है। पवन जल्लाद ने वर्ष 2020 में निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के चार दोषियों को तिहाड़ जेल में फांसी दी थी। (Muskan Rastogi Death Sentence) हालांकि, मुस्कान और साहिल के मामले में उन्हें जिम्मेदारी सौंपे जाने की अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
Muskan Rastogi Death Sentence: बक्सर जेल में तैयार होती है विशेष रस्सी

भारत में मृत्युदंड के मामलों में बिहार की बक्सर सेंट्रल जेल का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। यहां लंबे समय से फांसी के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष रस्सी तैयार की जाती है। इस जेल को खास तौर पर मजबूत मनीला रस्सी बनाने के लिए जाना जाता है।
बक्सर जेल में तैयार होने वाली रस्सी सामान्य रस्सी से अलग होती है। इसे विशेष सामग्री से तैयार किया जाता है और इसकी मजबूती का विशेष ध्यान रखा जाता है। (Muskan Rastogi Death Sentence) वर्ष 2006 की एक रिपोर्ट के अनुसार, बक्सर जेल में मोम की परत चढ़ी मनीला रस्सी तैयार की जाती थी। उस समय जेल प्रशासन ने बताया था कि यहां की रस्सी देश की दूसरी जेलों को भी भेजी जाती है।
संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के मामले में भी तिहाड़ जेल प्रशासन ने बक्सर जेल से विशेष रस्सी मंगाई थी। (Muskan Rastogi Death Sentence) इसी तरह वर्ष 2004 में धनंजय चटर्जी को फांसी दिए जाने के लिए भी बक्सर से रस्सी भेजे जाने की जानकारी सामने आई थी।
इसलिए जब किसी बड़े मामले में अदालत मृत्युदंड सुनाती है, तब बक्सर जेल की विशेष रस्सी का जिक्र भी होने लगता है। हालांकि, मुस्कान और साहिल के मामले में अभी रस्सी मंगाने का कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।
निर्भया के चार दोषियों को सजा देने वाले मेरठ के जल्लाद
मृत्युदंड के मामलों में मेरठ के पवन जल्लाद का नाम भी खास है। पवन ऐसे परिवार से आते हैं, जिसकी कई पीढ़ियां जल्लाद के काम से जुड़ी रही हैं। उन्हें इस परिवार की तीसरी पीढ़ी का जल्लाद बताया जाता है।
20 मार्च 2020 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले के चार दोषियों को एक साथ फांसी दी गई थी। इनमें मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह शामिल थे। इन चारों को फांसी देने की जिम्मेदारी मेरठ के पवन जल्लाद ने निभाई थी। इस घटना के बाद उनका नाम देशभर में चर्चा में आया था।
पवन जल्लाद के परिवार में यह काम पीढ़ियों से होता आया है। (Muskan Rastogi Death Sentence) हालांकि, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में उनके परिवार की पीढ़ियों की संख्या को लेकर तीसरी और चौथी पीढ़ी, दोनों तरह के उल्लेख मिलते हैं।
मुस्कान और साहिल को सजा-ए-मौत सुनाए जाने के बाद पवन जल्लाद का नाम सामने आना स्वाभाविक है, लेकिन अभी यह तय नहीं है कि इस मामले में भी फांसी की जिम्मेदारी उन्हें ही मिलेगी। (Muskan Rastogi Death Sentence) इसके लिए पहले अदालतों में सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होनी जरूरी हैं।
आजाद भारत की पहली महिला हो सकती है मुस्कान, शबनम को भी मिली थी मृत्युदंड की सजा
मुस्कान के मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आजादी के बाद भारत में अब तक किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। हालांकि, कई महिलाओं को अदालत से मृत्युदंड की सजा मिल चुकी है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा की शबनम का मामला इसका सबसे चर्चित उदाहरण है।
वर्ष 2008 में शबनम और उसके प्रेमी सलीम को शबनम के परिवार के सात सदस्यों की हत्या का दोषी पाया गया था। मृतकों में उसके माता-पिता, भाई, भाभी, बहन और 10 महीने का भतीजा शामिल था। वर्ष 2010 में अमरोहा की अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी शबनम की सजा बरकरार रखी। उसकी दया याचिकाएं भी खारिज हुईं। वर्ष 2021 में उसे फांसी दिए जाने की संभावना के बीच मथुरा जेल में तैयारियों की खबरें सामने आई थीं। पवन जल्लाद के मथुरा जेल जाने की भी खबर आई थी। लेकिन शबनम को फांसी नहीं दी गई।
भारत में महिलाओं को फांसी दिए जाने का मामला इसलिए भी अलग है क्योंकि मथुरा जेल में महिला दोषियों को फांसी देने की व्यवस्था है। शबनम को लेकर भी इसी जेल का नाम सामने आया था।
भारत में महिलाओं को फांसी दिए जाने का मामला इसलिए भी अलग है क्योंकि मथुरा जेल में महिला दोषियों को फांसी देने की व्यवस्था है। शबनम को लेकर भी इसी जेल का नाम सामने आया था।
भारत में मृत्युदंड का इतिहास आजादी के शुरुआती वर्षों से जुड़ा हुआ है। (Muskan Rastogi Death Sentence) महात्मा गांधी की हत्या के मामले में दोषी नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को 15 नवंबर 1949 को अंबाला जेल में फांसी दी गई थी। इन्हें आजाद भारत में फांसी दिए जाने वाले शुरुआती और सबसे चर्चित दोषियों में गिना जाता है।
इसके बाद वर्ष 1982 में दिल्ली में दो बच्चों गीता और संजय चोपड़ा के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी रंगा और बिल्ला को 31 जनवरी को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।
वर्ष 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के मामले में दोषी सतवंत सिंह और केहर सिंह को 6 जनवरी को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।
वर्ष 1995 में तमिलनाडु के कुख्यात अपराधी ऑटो शंकर को (Muskan Rastogi Death Sentence) हत्या के मामले में सलेम सेंट्रल जेल में फांसी दी गई। वर्ष 1997 में मध्य प्रदेश के कमटा प्रसाद तिवारी को जबलपुर जेल में फांसी दिए जाने का उल्लेख भी उपलब्ध संकलित रिकॉर्ड में मिलता है।
इसके बाद लंबे अंतराल के बाद 14 अगस्त 2004 को पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी को कोलकाता की अलीपुर जेल में फांसी दी गई। (Muskan Rastogi Death Sentence) उसे एक स्कूली छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था।
वर्ष 2012 में मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के दोषी अजमल कसाब को 21 नवंबर को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गई।
इसके बाद 9 फरवरी 2013 को संसद भवन पर हुए आतंकी हमले के मामले में दोषी अफजल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी दी गई।
इसके बाद 20 मार्च 2020 को निर्भया मामले के चार दोषियों मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक साथ फांसी दी गई। (Muskan Rastogi Death Sentence) तब से लेकर अक्टूबर 2026 तक भारत में किसी अन्य दोषी को फांसी नहीं दी गई है।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि भारत में आजादी के बाद फांसी दिए गए सभी लोगों की एक संपूर्ण और प्रमाणित सरकारी सूची उपलब्ध नहीं है। पुराने जेल रिकॉर्ड की कमी के कारण अलग-अलग स्रोतों में आंकड़ों का अंतर मिलता है। (Muskan Rastogi Death Sentence) इसलिए ऊपर प्रमुख रूप से दर्ज और चर्चित मामलों का उल्लेख किया गया है।
जिला अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक क्या है मृत्युदंड की प्रक्रिया
किसी व्यक्ति को जिला अदालत से मृत्युदंड की सजा मिलना और वास्तव में उसे फांसी दिया जाना दो अलग-अलग बातें हैं। (Muskan Rastogi Death Sentence) भारतीय कानून में मृत्युदंड के मामले में कई स्तरों पर न्यायिक प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
सबसे पहले सत्र न्यायालय मृत्युदंड सुनाता है। इसके बाद इस सजा को संबंधित हाईकोर्ट से अनिवार्य रूप से मंजूरी मिलनी होती है। हाईकोर्ट पूरे मामले और साक्ष्यों की समीक्षा करता है। (Muskan Rastogi Death Sentence) वह सजा को बरकरार रख सकता है, बदल सकता है या दोषी को बरी भी कर सकता है।
हाईकोर्ट से सजा बरकरार रहने के बाद दोषी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है। (Muskan Rastogi Death Sentence) इसके अलावा पुनर्विचार याचिका और निर्धारित परिस्थितियों में उपचारात्मक याचिका का विकल्प भी उपलब्ध रहता है।
सभी न्यायिक विकल्प समाप्त होने के बाद दोषी राज्यपाल और राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका भी लगा सकता है। (Muskan Rastogi Death Sentence) इन प्रक्रियाओं के बाद ही जेल प्रशासन को मृत्युदंड पर अमल के लिए आगे की कार्रवाई करने का रास्ता मिलता है।
मुस्कान और साहिल के मामले में भी अभी यही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। (Muskan Rastogi Death Sentence) मेरठ की जिला अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया है, लेकिन हाईकोर्ट की पुष्टि और आगे की कानूनी प्रक्रियाएं बाकी हैं। इसलिए अभी उनकी सजा पर अंतिम मुहर लगना बाकी है।
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