बलरामपुर। प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्ते के जाति प्रमाणपत्र जांच विवाद ने बलरामपुर में गुरुवार को माहौल गर्म कर दिया। दस्तावेजों की जांच में देरी के आरोपों से नाराज़ सर्व आदिवासी समाज ने नेशनल हाईवे पर जाम लगाकर प्रशासन पर तत्काल निर्णय का दबाव बनाया। हाईकोर्ट के निर्देशों के बीच विधायक की ओर से दस्तावेज जमा कर दिए जाने के बाद भी समाज ने 11 दिसंबर को अंतिम फैसला सुनाने की मांग तेज कर दी है।
प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र की विधायक शकुंतला पोर्ते के जाति प्रमाणपत्र मामले ने गुरुवार को बलरामपुर में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक तनाव पैदा कर दिया। जाति सत्यापन प्रक्रिया में हो रही कथित देरी से नाराज़ सर्व आदिवासी समाज के सैकड़ों लोग आज सुबह से ही जिला मुख्यालय पहुंच गए और कलेक्टोरेट के सामने प्रदर्शन करते हुए कुछ समय के लिए नेशनल हाईवे-343 को रोक दिया।
यह विवाद तब तेज हुआ जब बिलासपुर हाईकोर्ट ने विधायक के जाति प्रमाणपत्र की जांच का आदेश देते हुए बलरामपुर कलेक्टर को सत्यापन की पूरी प्रक्रिया जल्द पूरा करने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ताओं धन सिंह धुर्वे और एक अन्य आवेदक ने कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि, विधायक पोर्ते मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की रहने वाली हैं, जहां गोंड़ समुदाय अनुसूचित जाति वर्ग में सूचीबद्ध है। याचिका में यह भी कहा गया कि, विधायक को 2002-03 में वाड्रफनगर एसडीएम द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र पति की जाति के आधार पर जारी किया गया था, जो नियमों के विपरीत है।
जानकारी अनुसार, प्रक्रिया में कलेक्टर कार्यालय की ओर से लगातार तीन नोटिस भेजे गए, लेकिन विधायक की ओर से दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इसी बीच, बढ़ते विवाद और समाज के विरोध को देखते हुए जिला स्तरीय छानबीन समिति ने 27 नवंबर की नई तिथि तय की। इस बार विधायक शकुंतला पोर्ते ने अपने वकील के माध्यम से जन्म प्रमाणपत्र, शैक्षणिक दस्तावेज और वंशावली सहित आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत कर दिए।
दस्तावेज जमा होने के बाद भी सर्व आदिवासी समाज ने लटकते मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन से 11 दिसंबर को आखिरी निर्णय लेने की लिखित गारंटी मांगी। आक्रोशित भीड़ ने हाईवे पर बैठकर नारेबाजी की और जांच में पारदर्शिता की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य अजजा आयोग के पूर्व अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह और शिकायतकर्ता धन सिंह धुर्वे ने किया। देर शाम तक चलने वाले इस आंदोलन में बड़ी संख्या में समाज के प्रतिनिधि, पुरुष और महिलाएं शामिल रहीं।
शिकायतकर्ता धन सिंह धुर्वे ने आरोप लगाया कि, मामले को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है। बार-बार नई तारीख देकर जांच को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। हम निष्पक्ष और समयबद्ध फैसले की मांग कर रहे हैं।
इधर पूरे विवाद पर विधायक शकुंतला पोर्ते का भी प्रतिक्रिया सामने आया है। उन्होंने कहा कि, मेरे सभी दस्तावेज वैध हैं। कुछ लोगों को मेरी राजनीतिक प्रगति से जलन है, इसलिए इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। मैं अंबिकापुर में पैदा हुई हूं, मेरे पिता वहीं नौकरी करते थे। मेरी जाति पर सवाल उठाना केवल साजिश है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रमाणपत्र जारी करने वाले एसडीएम ने पूरी प्रक्रिया के बाद ही दस्तावेज दिया है और निराधार आरोपों से कोई फर्क नहीं पड़ता।
उधर, जिला प्रशासन ने समाज के दबाव के बीच यह जानकारी दी कि, जाति सत्यापन के लिए अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निश्चित कर दी गई है। अब सभी की नज़र इसी तारीख पर टिकी हुई है, जब मामले के अगले चरण पर महत्वपूर्ण निर्णय की उम्मीद की जा रही है।
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