अमरनाथ पाठक, (सीनियर एडिटर) हजारीबाग। गुजरे साल 2023 के साथ यहां बतौर एसपी चोथे मनोज रतन को हजारीबाग जिले से विदाई दी गई और नए एसपी के रूप में अब अरविंद कुमार सिंह ने कमान संभाल ली है। इसके साथ ही हजारीबाग के नए एसपी अरविंद कुमार सिंह के सामने बड़ी चुनौतियां और जिम्मेवारियां भी सामने हैं। आमजनमानस का मानना है कि सबसे पहले तो जिले में बढ़ते अपराध को गिराना होगा। साथ ही यह भी जताना होगा कि जनता की सुरक्षा पुलिस के हाथों में है। हां यह भी सही है कि लोगों को भी पुलिस के साथ को-ऑपरेट करना होगा। बिना जनसहयोग के कुछ भी संभव नहीं है। अब तक की पुलिसिया छवि से खुद को बदलना होगा। चूंकि आज भी आम आदमी थाना-पुलिस से दूर ही रहना चाहती है। आखिर क्यों, इसका आत्ममंथन, आत्मचिंतन और आत्मविश्लेषण खुद पुलिस को ही करना होगा।
ऐसी बात नहीं कि अब तक जो भी एसपी आए, उन्होंने अपराध पर अंकुश लगाने की कोशिश नहीं की। फिर भी जिस तरह से अपराध पनप रहे हैं, उस पर लगाम नहीं कस पाया। ऐसे में पूर्व में भी बतौर डीएसपी हजारीबाग जिले को करीब से देख चुके नए एसपी अरविंद कुमार सिंह के समक्ष अपराध का ग्राफ गिराना बड़ी चुनौती है। आए दिन जिस तरह से चोरी, छिनतई, लूट, हत्या आदि के मामले सामने आते रहे हैं, इस पर अंकुश लगाना होगा। साथ ही हजारीबाग में नशे का जो कारोबार हो रहा है और उसमें अधिकांश किशोर और युवा वर्ग लिप्त हैं, उस पर भी अंकुश लगाते हुए नशोखोरी से उन्हें निजात दिलानी होगी।
अपराध पनपने की एक बड़ी वजह नशाखोरी को माना जा रहा है। कोयले के काले कारोबार को भी नियंत्रित करना होगा। जिले में विधि-व्यवस्था पटरी पर रहे, इसके लिए पुलिस को आम आदमी का भरोसा जीतना होगा। फ्रेंडली पुलिसिंग के मर्म को जमीनी अमलीजामा पहनाना होगा। थानेदारों की कार्य संस्कृति में बड़ा बदलाव लाना होगा। जिले के कई ऐसे थाने हैं, जहां जमीन से जुड़े अपराध के मामले जाते रहे हैं। उन मामलों का निबटारा पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द रहा है। पुलिस पर कई तरह के आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहे हैं। आम जनमानस न्याय नहीं मिलने की शिकायत भी करते रहे हैं।
मोबाइल गुम होने का सनहा दर्ज कराने तक में पुलिस पर ऊंगलियां उठती रही हैं। वैसे नए एसपी ने अपने प्राथमिक वक्तव्यों से आम आदमी को न्याय का भरोसा दिया है, यह सुखद पहलू है। लेकिन आने वाले समय में उनका यह भरोसा धरातल पर कितना कामयाब होता दिखेगा, यह देखनेवाली बात होगी। जब तक आम आदमी अपनी पीड़ा के निबटारे के लिए पुलिस थानों में खुद को सहज और सरल नहीं पाएगी, तब तक पुलिस और जनता के बीच की खाई नहीं पाटी जा सकती। अब इस दूरी को मिटाना नए एसपी के लिए बड़ी चुनौती है। इसके लिए पुलिस के व्यवहार में कैसे परिवर्तन कर पाएंगे, इसकी आस हजारीबाग की आमजनमानस लगाए बैठे हैं। जिस तरह से नए एसपी ने अपने प्रेषित संदेश के माध्यम से भरोसा देने का प्रयास किया है, निश्चित रूप से उससे नववर्ष 2024 में पुलिस-जनता के बीच विश्वास की जुड़ने वाली कड़ी की एक नई उम्मीद तो जगती है।
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