
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। जिले के रामानुजगंज स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। बैंक की लापरवाही का एक मामला सामने आया है, जिसमें एक किसान से ऋण की राशि दो बार वसूल ली गई। यह अनियमितता तब उजागर हुई, जब किसान ने स्वयं अपने खाते और रसीदों का मिलान किया। फिलहाल यह एक मामला सामने आया है, लेकिन इससे ग्रामीण क्षेत्र के अन्य किसानों के खातों में भी इसी तरह की गड़बड़ी की आशंका गहराती जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम धनपुरी निवासी किसान रामजन्म महतो ने 28 नवंबर 2025 को अपने खाते में 20,922 रुपये जमा कर ऋण चुका दिया था। इस भुगतान की ट्रांजेक्शन संख्या TXN733330032622 दर्ज है। इसके बावजूद, 8 जनवरी 2026 को धान खरीदी के एवज में प्राप्त राशि से पुनः 20,922 रुपये काट लिए गए, जिसकी रिसीविंग 13 जनवरी 2026 को जारी की गई।
किसान रामजन्म महतो का कहना है कि यदि उन्होंने स्वयं रसीद और खाते का विवरण नहीं मिलाया होता, तो यह राशि स्थायी रूप से कट जाती और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाती।

यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता ऐसी आशंका अब सामने आ रही है। रामजन्म महतो पढ़े-लिखे किसान हैं और लेनदेन का हिसाब रखने में सक्षम हैं, इसलिए यह अनियमितता पकड़ में आ गई। लेकिन क्षेत्र में अनेक किसान ऐसे हैं, जो बैंकिंग प्रक्रिया, डिजिटल एंट्री और खाता विवरण की बारीकियों से परिचित नहीं हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं उनके खातों से भी इसी तरह राशि तो नहीं काट ली गई।
पहले भी विवादों में रही है शाखा
उल्लेखनीय है कि रामानुजगंज स्थित यह सहकारी बैंक शाखा पहले भी विवादों में रह चुकी है। जानकारी अनुसार, वर्ष 2023 में केसीसी से जुड़े लगभग 1.33 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया था। वहीं, 2012 से 2022 के बीच फर्जी खातों के माध्यम से करीब 26 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में 11 से अधिक बैंक कर्मियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। ऐसे में वर्तमान मामला बैंक की आंतरिक प्रणाली और निगरानी पर फिर से प्रश्नचिह्न लगाता है।

किसी-किसी का ऐसा हो जाता है : ब्रांच मैनेजर
इस पूरे मामले पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, शाखा रामानुजगंज के शाखा प्रबंधक लल्लू राम यादव ने बताया कि, “ऐसी शिकायतें बहुत कम आती हैं। किसी-किसी मामले में ऐसा हो जाता है। किसान ऋण चुकाकर रिसीविंग ले लेता है, लेकिन उसे सोसायटी में जमा नहीं करता। इससे खाते में लोन बकाया दिखता रहता है और अगली बार धान बिक्री के समय वही राशि दोबारा कट जाती है। जब किसान शिकायत लेकर हमारे पास दोबारा आता है, तो खाता मिलान कर राशि रिवर्स कर दी जाती है। आमतौर पर यह प्रक्रिया मार्च माह में की जाती है। अभी तक एक-दो शिकायतें ही आई हैं।”
गंभीर सवाल बरकरार
हालांकि, बैंक प्रबंधन का यह तर्क अपनी जगह है, लेकिन वास्तविक चिंता उन किसानों को लेकर है, जो पढ़े-लिखे नहीं हैं या नियमित रूप से अपने खातों की जांच नहीं कर पाते। बिना शिकायत के खाते से कटी राशि स्वतः रिवर्स नहीं की जाती। यह स्थिति अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह मामला बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और किसानों के हितों की सुरक्षा को लेकर सोचने पर मजबूर करता है। अब देखना होगा कि बैंक प्रबंधन इस एक मामले को व्यक्तिगत भूल मानकर सीमित रखता है या व्यापक स्तर पर खातों की जांच कर संभावित प्रभावित किसानों को राहत देता है।
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