
बलरामपुर, विष्णु पांडेय। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज से महज 30 किलोमीटर दूर झारखंड के जंगलों में बाघ की लगातार मौजूदगी ने सीमा से लगे इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। गढ़वा जिले के भंडरिया और रमकंडा वन क्षेत्र में बाघ के पगमार्क और उसके शिकार के प्रमाण मिलने के बाद वन विभाग ने उसकी मौजूदगी की पुष्टि की है। हालांकि, अभी तक रामानुजगंज वन क्षेत्र में बाघ के पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है।
बाघ की गतिविधियों के सामने आने के बाद पलामू टाइगर रिजर्व समेत आसपास के वन क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है। संभावित आवाजाही वाले इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी तथा सर्च अभियान चला रही हैं।
पगमार्क मिले, मवेशियों के शिकार से बढ़ा डर
गढ़वा वन विभाग के अनुसार बाघ की पहचान उसके पंजों के निशान और शिकार के प्रमाणों के आधार पर हुई है। हालांकि अब तक कैमरा ट्रैप में बाघ की तस्वीर कैद नहीं हो सकी है। जिन इलाकों में उसकी मौजूदगी के संकेत मिले हैं, वहां निगरानी बढ़ाने के साथ अतिरिक्त कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।
हाल ही में रंका के ढेगुरा जंगल में तीन बकरियों और एक बछड़े के बाघ द्वारा शिकार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले भंडरिया क्षेत्र में भी पशुओं के शिकार की सूचना मिली थी।
गुरुवार को भंडरिया, रमकंडा और बड़गड़ वन क्षेत्र में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में मिले पंजों के निशान सामान्य जंगली जानवरों के पदचिह्नों से अलग हैं।
रामानुजगंज वन क्षेत्र में आने का कितना खतरा?
भंडरिया क्षेत्र रामानुजगंज से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर है। दोनों इलाकों के बीच जंगल का बड़ा क्षेत्र मौजूद है। ऐसे में बाघ के एक वन क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जाने की संभावना को देखते हुए रामानुजगंज से लगे वन क्षेत्रों में भी सतर्कता जरूरी हो गई है।
हालांकि, वन विभाग ने अभी तक रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल बाघ की गतिविधियां झारखंड के भंडरिया और रमकंडा क्षेत्र में ही सामने आई हैं।
डीएफओ ने की बाघ की मौजूदगी की पुष्टि
गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि भंडरिया और रमकंडा क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली है। पगमार्क की जांच के बाद वन विभाग ने इसकी पुष्टि की है। ग्रामीणों से मिली जानकारी के आधार पर संबंधित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
वन विभाग की नजर बाघ की संभावित दिशा और गतिविधियों पर बनी हुई है। कैमरा ट्रैप के जरिए उसकी तस्वीर और मूवमेंट रिकॉर्ड करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुबह शाम जंगल जाने से बचने की अपील
वन विभाग ने जंगल से लगे गांवों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। ग्रामीणों से खासकर सुबह और शाम के समय जंगल की ओर नहीं जाने तथा अनावश्यक रूप से जंगल में प्रवेश नहीं करने की अपील की गई है।
इसके अलावा बाघ की मौजूदगी या उसके किसी भी मूवमेंट की जानकारी मिलने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने कहा गया है।
पीटीआर का कॉरिडोर जोड़ता है कई जंगल
पलामू टाइगर रिजर्व झारखंड का प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्र है। इसका वन्यजीव कॉरिडोर छत्तीसगढ़ के बलरामपुर और मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। यह कॉरिडोर बांधवगढ़ और संजय डुबरी टाइगर रिजर्व समेत आसपास के जंगलों से भी जुड़ता है।
वन्यजीव कॉरिडोर के कारण बाघों के एक जंगल से दूसरे जंगल में आने जाने की संभावना बनी रहती है। यही वजह है कि झारखंड के जंगलों में बाघ की मौजूदगी सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ से लगे वन क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।
बाघ के साथ हाथियों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
गढ़वा के दक्षिणी वन क्षेत्रों में सिर्फ बाघ ही नहीं, बल्कि जंगली हाथियों की गतिविधियों ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। रंका, भंडरिया, चिनियां, बड़गड़ और रमकंडा के जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ी हैं।
पिछले एक सप्ताह में रंका और चिनियां क्षेत्र में जंगली हाथियों के हमले में दो लोगों की मौत हो चुकी है। एक ओर बाघ द्वारा मवेशियों के शिकार की घटनाओं से ग्रामीणों में डर है, तो दूसरी ओर हाथियों के झुंड की मौजूदगी से जंगल से लगे गांवों के लोग परेशान हैं।
वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव जंगल के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। विभाग का प्रयास मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करना और ग्रामीणों को सतर्क एवं जागरूक रखना है। फिलहाल सबसे बड़ी नजर इस बात पर है कि भंडरिया और रमकंडा में सक्रिय बाघ आगे किस दिशा में बढ़ता है।
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