
रांची, एजेंसी। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी के विरोध में रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में पिछले दस दिनों से अभ्यर्थियों का धरना-सत्याग्रह जारी है। छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर आंदोलन करते हुए अपनी मांग सरकार तक पहुंचाने में जुटे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। ऐसे में संबंधित परीक्षाओं को रद्द कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।
मशाल जुलूस से लेकर भूख हड़ताल तक आंदोलन
छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर पिछले दस दिनों में अलग-अलग तरीके से विरोध दर्ज कराया है। धरना, सत्याग्रह और मशाल जुलूस के जरिए सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर खींचने का प्रयास किया गया है।
अभ्यर्थी न्याय मंच से जुड़े देवेंद्रनाथ महतो भी भूख हड़ताल पर हैं। उनकी भूख हड़ताल का तीसरा दिन रहा। आंदोलन के दौरान तबीयत खराब होने के बावजूद उन्होंने अपनी मांगों के पूरा होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही। उन्होंने अपनी इस दिन की भूख हड़ताल को दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन को समर्पित करने की घोषणा की।
सरकार ने कमेटी बनाने का लिया निर्णय
दस दिनों से चल रहे आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने छात्रों की शिकायतों पर बातचीत के लिए कमेटी गठित करने का निर्णय लिया है। हालांकि आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों के मुताबिक अभी तक सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे सीधे बातचीत करने नहीं पहुंचा है।

छात्रों की नजर अब सरकार की ओर से होने वाली अगली कार्रवाई पर है। उनका कहना है कि केवल आश्वासन के बजाय मामले में ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए।
आंदोलन में राजनीतिक दखल से दूरी
इस आंदोलन की एक खास बात यह है कि छात्रों ने राजनीतिक दलों की सीधी भागीदारी को लेकर स्पष्ट दूरी बनाई हुई है। आंदोलन को शांतिपूर्ण और मुद्दे तक सीमित रखने के लिए अभ्यर्थियों ने अपने स्तर पर कुछ नियम भी तय किए हैं।
इन नियमों के मुताबिक मंच से राजनीतिक, धार्मिक या जातिगत टिप्पणी नहीं की जाएगी। वक्ताओं से केवल परीक्षा और अभ्यर्थियों से जुड़े मुद्दों पर बात करने की अपील की गई है। इसके अलावा किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत आरोप लगाने और अपशब्दों के इस्तेमाल से भी बचने का निर्णय लिया गया है।
छात्रों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विरोध में जाना नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित कराना है।
CJP ने छात्रों के आंदोलन को दिया समर्थन
JPSC और JSSC परीक्षा विवाद को लेकर चल रहे आंदोलन को अब दूसरे संगठनों का समर्थन भी मिलने लगा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी आंदोलनरत अभ्यर्थियों के समर्थन की घोषणा की है।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत करने की जानकारी दी और कहा कि संगठन उनकी मांगों के साथ खड़ा है। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी सोशल मीडिया के जरिए झारखंड के युवाओं के समर्थन की बात कही है।
बाहर से भी पहुंच रही मदद
लगातार चल रहे धरना-सत्याग्रह के बीच आंदोलन स्थल पर छात्रों के भोजन और पानी की व्यवस्था में भी लोगों का सहयोग मिलने लगा है। आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, दिल्ली और गुजरात सहित अलग-अलग स्थानों से कुछ लोग ऑनलाइन भोजन बुक कराकर धरनास्थल पर भेज रहे हैं।
इसके अलावा चैती दुर्गा पूजा समिति पिछले कुछ दिनों से छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रही है। कई सामाजिक संगठन और अन्य संस्थाएं भी अपने स्तर पर आंदोलनकारियों की मदद कर रही हैं।
शुरुआत में छात्रों के सामने भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं को लेकर परेशानी थी, लेकिन अब स्थानीय और बाहरी स्तर से मिल रहे सहयोग के कारण व्यवस्था काफी हद तक संभल गई है।
अलग-अलग संगठनों ने आगे के कार्यक्रम किए घोषित
आंदोलन से जुड़े अलग-अलग छात्र संगठनों ने आने वाले दिनों के लिए अपने कार्यक्रम भी तय किए हैं। JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की ओर से विधानसभा मार्च का ऐलान किया गया है। वहीं आईसा ने भी सांस्कृतिक कार्यक्रम और विधानसभा मार्च की घोषणा की है।
आंदोलनकारियों का दावा है कि झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और गुजरात समेत अन्य राज्यों से भी छात्रों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
मुख्यमंत्री बोले- सरकार मामले को गंभीरता से देख रही
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की चिंताओं को लेकर कहा है कि सरकार पूरे मामले से अवगत है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से देख रही है और जांच दल लगातार काम कर रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जांच से जुड़े अधिकारियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है और जल्द ही इस विषय पर छात्रों तथा राज्य की जनता को जानकारी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार किसी भी मामले में केवल औपचारिकता पूरी करने के पक्ष में नहीं है, बल्कि जिस विषय की जांच की जा रही है, उसका समाधान निकालना उद्देश्य है।

विपक्ष ने भी सरकार को घेरा
JPSC-JSSC विवाद को लेकर विपक्ष भी सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
उन्होंने दावा किया है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले संभावित प्रश्नों की जानकारी देने के लिए दूसरे राज्यों में ले जाया गया था और वहां उन्हें प्रश्न याद कराए गए। उनका यह भी दावा है कि इनमें से कुछ सवाल परीक्षा में आए।
हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले की सच्चाई जांच पूरी होने और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब छात्रों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर
दस दिनों से जारी आंदोलन के बाद सरकार द्वारा कमेटी बनाने के निर्णय ने मामले को बातचीत की दिशा में आगे बढ़ाया है। लेकिन छात्र परीक्षा रद्द करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग पर कायम हैं।
अब देखना होगा कि सरकार की ओर से गठित होने वाली कमेटी छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों से कब सीधी बातचीत शुरू होती है। फिलहाल जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों का सत्याग्रह जारी है और आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने के संकेत हैं।
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