
रामगढ़ (मनोज मिश्र)। जिले के नेमरा और लुकैयाटांड़ बरलंगा में मंगलवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि श्रद्धा और भावुक माहौल में मनाई गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनकी प्रतिमा का अनावरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन और झारखंड के अन्य पूर्वजों ने जिस शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया, उससे सीख लेना आज की पीढ़ी का कर्तव्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग झारखंड राज्य का सपना साकार करने वाले इन महान लोगों के संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए राज्य को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी अब सभी की है।
रामगढ़ जिले के नेमरा और लुकैयाटांड़ बरलंगा में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि शिबू सोरेन की स्मृति और उनके विचार केवल उनके परिवार या जन्मस्थली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे झारखंड और देश में उन्हें सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रथम पुण्यतिथि का यह अवसर औपचारिकता का नहीं, बल्कि महान व्यक्तित्वों के संघर्ष और विचारों को अपने जीवन में उतारने का दिन है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उनके और पूरे परिवार के लिए अत्यंत भावुक है। उन्होंने शिबू सोरेन को याद करते हुए कहा कि जीवन का अंतिम सत्य यही है कि जिसने धरती पर जन्म लिया है, उसे एक दिन प्रकृति में विलीन होना है। शिबू सोरेन भी इसी शाश्वत सत्य के तहत पंचतत्व में विलीन हुए, लेकिन उनके विचार और संघर्ष आज भी लोगों के बीच जीवित हैं।

लुकैयाटांड़ स्थित सोना-सोबरन विद्यालय परिसर में शिबू सोरेन की प्रतिमा का अनावरण करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिमा स्थापित करने का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और जड़ों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि आजादी से पहले और उसके बाद झारखंड के लोगों ने जिस तरह का शोषण झेला, उसके खिलाफ पूर्वजों ने जिस निडरता से संघर्ष किया, उससे सीख लेना सभी का कर्तव्य है।
मुख्यमंत्री ने अपने दादा अमर शहीद सोबरन मांझी को भी याद किया। उन्होंने बताया कि सोबरन मांझी ने शिक्षक के रूप में समाज में शिक्षा की अलख जगाई और असामाजिक तत्वों ने उनकी हत्या कर दी थी। हेमंत सोरेन ने कहा कि आज भी समाज में अलग-अलग रूपों में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो लोगों को गुमराह करने और आपस में बांटने का प्रयास करती हैं।
उन्होंने कहा कि इसका स्थायी समाधान समाज की एकजुटता, आपसी सम्मान और भाईचारे में है। जब तक लोग एक-दूसरे के प्रति सम्मान और मानवीय भावना नहीं रखेंगे, तब तक छोटी-छोटी बातों पर आपसी विवाद होते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा और क्षमता का उपयोग सकारात्मक दिशा में करें और भटकाव से दूर रहें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने संघर्ष के माध्यम से झारखंड को अलग पहचान दिलाने में योगदान दिया। उनके जैसे नेताओं ने अपने खून-पसीने से राज्य के निर्माण की नींव रखी। अब राज्य को सजाने और संवारने की जिम्मेदारी सभी की है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पहुंचे और लोगों की आवाज सरकार तक सीधे पहुंचे। उन्होंने कहा कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेमरा में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने को देखते हुए लुकैयाटांड़ में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, ताकि आने वाले समय में बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर अपने महान नायकों को याद कर सकें। उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, निर्मल महतो, विनोद बिहारी महतो और शिबू सोरेन जैसे महान लोगों के संघर्ष की गवाह रही है।

प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिबू सोरेन की प्रतिमा का अनावरण करने के साथ उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान रूपी सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया गया। इसके अलावा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों और सहायता का वितरण किया गया।
कार्यक्रम में मंत्री राधा कृष्ण किशोर, संजय प्रसाद यादव, दीपिका पांडेय सिंह, योगेंद्र प्रसाद, शिल्पी नेहा तिर्की, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक उमाकांत रजक, कुमार जयमंगल सिंह, अमित महतो, ममता देवी, पूर्व मंत्री बेबी देवी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित राज्य सरकार के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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