
हजारीबाग। गोंदलपुरा, बादम एवं केरेडारी कोल ब्लॉक आवंटन के विरोध में 20 जनवरी को गोंदलपुरा स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय खेल मैदान में आयोजित पर्यावरण संरक्षण जनसभा से जुड़े घटनाक्रम को लेकर झारखंड किसान सभा एवं झारखंड विस्थापित संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सह पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर अडानी समूह और राज्य सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
प्रेस वार्ता में मेहता ने कहा कि 20 जनवरी को पर्यावरण संरक्षण के नाम पर आयोजित जनसुनवाई में अडानी कंपनी द्वारा बाहर के ग्रामीणों को बुलाया गया था, जिसका स्थानीय ग्रामीणों एवं रैयतों ने विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनसुनवाई को प्रभावित करने की नीयत से बाहरी लोगों की भीड़ जुटाई गई थी, जिसे आक्रोशित ग्रामीणों ने मौके से खदेड़ दिया। यह स्पष्ट करता है कि स्थानीय जनता इस परियोजना के खिलाफ है।
मेहता ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन भाजपा की केंद्र सरकार इस कानून को लागू करने से कतरा रही है और राज्य सरकार भी इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रही है। गोंदलपुरा कोल ब्लॉक, जो अडानी को आवंटित किया गया है, पूरी तरह उपजाऊ भूमि क्षेत्र में आता है। इसी प्रकार बादम (एनटीपीसी), बड़का गांव एवं केरेडारी में आवंटित कोल ब्लॉक भी उपजाऊ कृषि भूमि पर आधारित हैं।
उन्होंने बताया कि गोंदलपुरा में अब तक चार बार ग्राम सभा बुलाई गई, लेकिन हर बार स्थानीय ग्रामीणों और रैयतों के विरोध के कारण ग्राम सभा सफल नहीं हो सकी। 20 जनवरी को आयोजित ग्राम सभा में भी बाहरी लोगों की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है। मेहता ने कहा कि यह कंपनियों की मनमानी को दर्शाता है।
मेहता ने कहा कि 12 अप्रैल 2023 से गोंदलपुरा कोल ब्लॉक आवंटन के विरोध में स्थानीय ग्रामीण और रैयत लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व जिला एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सैकड़ों ग्रामीणों पर मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पूर्व में पकरी बरवाडीह, चट्टी बरियातू, केरेडारी जैसे क्षेत्रों में एनटीपीसी द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद उत्पादन शुरू हो चुका है, लेकिन स्थानीय लोगों को बहुत कम रोजगार मिला है, जबकि बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी गई। भूमि का मुआवजा भी अत्यंत कम बताया गया।
अंत में मेहता ने मांग की कि बड़कागांव, केरेडारी और गोंदलपुरा के रैयतों के साथ भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का सख्ती से पालन किया जाए तथा सभी विवादित कोल ब्लॉक आवंटनों को तत्काल रद्द किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून को लागू कराने के लिए झारखंड विस्थापित संघर्ष मोर्चा लगातार आंदोलन कर रहा है और आगे भी इसे और तेज किया जाएगा।
इस मौके पर खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम, झारखंड आंदोलनकारी अनंत कुमार आर्या, निजाम अंसारी, मोहम्मद आसिफ और विजय मिश्रा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
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