
हजारीबाग। यह बड़े ही गर्व और गौरव का पल है कि संघर्षों का दामन थाम हजारीबाग के इचाक स्थित रतनपुर गांव की बेटी कृति कुमारी ने झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन क्रैक किया और सीडीपीओ बनीं। जिंदगी में उन्हें कई झंझावतों का सामना करना पड़ा पर हार नहीं मानी। जिद था लक्ष्य हासिल करने का, खुद को साबित करने का और कुछ कर दिखाने का।
उन्होंने तदबीर से अपनी तकदीर बदल दी और उस नज्म को साकार कर दिखाया कि… तुम साथ न दो मेरा, चलना मुझे आता है, हर आग से वाकिफ हूं, जलना मुझे आता है… तदबीर के हाथों से तकदीर बनानी है, जिंदगी और कुछ भी नहीं, सिर्फ मेरे संघर्षों की कहानी है…। लेकिन साथ दिया उनके जन्मदाता पिता सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर करुणा सिंह ने। कृति अपनी कामयाबी अपने पिता को समर्पित करती हैं, जिन्होंने हर पल उनका मनोबल बढ़ाया। कृति बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की थीं। तभी तो वर्ष 2018 में नेट क्वालिफाई कीं।
वहीं पीजी भूगोल में पूरे विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग की टाॅपर रहीं। वर्ष 2019 में झारखंड की गवर्नर रहीं, वर्तमान में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के कर कमलों से गोल्ड मेडल लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। जब जून 2019 में जेपीएससी का नोटिफिकेशन आया था, तो 10 जून 2024 को पीटी परीक्षा दीं। 16 जुलाई को उसी साल उसमें कामयाबी मिली। फिर आठ दिसंबर 2025 को मेंस का परिणाम आया। इसी साल नववर्ष में 7-8 जनवरी को साक्षात्कार के बाद खुशी से आह्लादित कर देने वाले नतीजे 10 जनवरी को आए।
उनकी बहन गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डाॅ अन्नपूर्णा कुमारी कहती हैं कि कृति के लग्न, परिश्रम और समर्पण ने उसके सपनों को पंख लगाए और वह अब पूरे आत्मविश्वास से उड़ान भर रही है। गांव की बेटी ससुराल पहुंची और फिर संघर्ष की कहानी शुरू हुई, लेकिन उसका अंत सुखद हुआ और यहीं से कृति के जीवन का नया सूर्योदय हुआ। कृति समाज के लिए उन लड़कियों और महिलाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जो मुसीबत आने पर संघर्ष के आगे जिंदगी हार बैठते हैं। हारा वही जो लड़ा नहीं…।
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