
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में कोयला खदान विरोध के दौरान हुई हिंसक घटना ने कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शन के दौरान एक महिला आरक्षक के साथ बदसलूकी करते हुए उसकी वर्दी फाड़ दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने अब एक और आरोपी को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही अब तक कुल 7 आरोपियों को हिरासत में लिया जा चुका है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी कन्हैया राठिया घटना के बाद फरार हो गया था और लगातार स्थान बदलते हुए ओडिशा पहुंच गया था। सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात करीब 2 बजे पुलिस टीम ने उसे ओडिशा से गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान यदि अन्य संलिप्त लोगों की पहचान होती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले इस मामले के मुख्य आरोपी चित्रसेन साव को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उसे सिग्नल चौक से न्यायालय तक पुलिस सुरक्षा में ले जाया गया। महिला आरक्षक के साथ मारपीट, वर्दी फाड़ने और अभद्र व्यवहार के आरोप में उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस घटना में आमगांव निवासी मंगल राठिया, चिनेश खमारी, प्रेमसिंह राठिया, कीर्ति श्रीवास और वनमाली राठिया भी शामिल थे। वहीं ग्राम झरना निवासी कन्हैया राठिया की गिरफ्तारी अब की गई है। एक आरोपी अब भी फरार बताया जा रहा है।
घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों ने महिला आरक्षक की वर्दी फाड़ने का वीडियो भी बनाया था, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में महिला आरक्षक रोते हुए प्रदर्शनकारियों से छोड़ने की गुहार लगाती नजर आती है। इससे पहले एक महिला थाना प्रभारी के साथ मारपीट का वीडियो भी सामने आ चुका है।
यह पूरा मामला 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। जिंदल पावर लिमिटेड की कोयला खदान परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के लोग 12 दिसंबर से धरने पर बैठे थे। 27 दिसंबर की सुबह लिबरा चौक पर सैकड़ों ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण हो गई।
दिन चढ़ने के साथ भीड़ की संख्या बढ़ती गई और दोपहर बाद हालात बेकाबू हो गए। भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी और महिला आरक्षक घायल हुए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उग्र भीड़ ने पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस समेत कई सरकारी वाहनों में आग लगा दी। इसके बाद जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट में घुसकर वहां मौजूद वाहनों और उपकरणों को नुकसान पहुंचाया गया। हालात संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन हिंसा को काबू में लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
बाद में जिंदल प्रबंधन ने प्रभावित गांवों के विरोध को देखते हुए प्रस्तावित कोल ब्लॉक के लिए जनसुनवाई नहीं कराने का फैसला लिया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और फरार आरोपी की तलाश जारी है।
ये भी पढ़िए………….
मध्यरात्रि ऑपरेशन में बड़ी सफलता: 25 किमी पीछा कर पकड़ा गया अवैध धान से लदा ट्रक, 750 बोरी जब्त

