
बलरामपुर। जिले के रामानुजगंज में आज भी ऐसे कई अनुभवी और कर्तव्यनिष्ठ चिकित्सक हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद ईमानदारी से लोगों की सेवा कर रहे हैं। लेकिन इसी नगर में एक ऐसा ‘बाबा’ भी सक्रिय है, जो न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि अंधविश्वास, अवैध दवाओं और झाड़फूंक के सहारे लोगों की जिंदगी से खुला खिलवाड़ कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि नगर के सबसे व्यस्तम मार्ग पर वर्षों से यह धंधा फल-फूल रहा है और जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा है।
रामानुजगंज नगर के बीचों-बीच, व्यस्ततम बीच चौक में एक तथाकथित बाबा वर्षों से खुलेआम ‘इलाज’ के नाम पर अंधविश्वास का कारोबार चला रहा है। खुद पांचवीं फेल यह बाबा पहले झाड़फूंक और तंत्र-मंत्र से रोग दूर करने का दावा करता है, लेकिन जब इससे बात नहीं बनती, तो वही बाबा आयुर्वेद और एलोपैथी दोनों पद्धतियों से इलाज करने लगता है। मानो तमाम चिकित्सीय डिग्रियां उसके पैजामे की जेब में हों।
यह कोई नया खेल नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा वर्षों से इसी अंदाज में भोले-भाले मरीजों को भ्रमित करता आ रहा है। महिला और पुरुष, दोनों ही उसके यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि न तो उसके पास किसी तरह की चिकित्सीय योग्यता है और न ही इलाज करने का वैधानिक अधिकार।
अवैध दवा भंडारण, नियमों की खुली धज्जियां
बाबा का कारनामा यहीं तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, वह नगर में स्थित एक बंद पड़ी दुकान में आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवाओं का भंडारण भी करता है। यह दुकान किसी अन्य व्यक्ति की बताई जा रही है, लेकिन उसकी चाबी बाबा के पास रहती है। हमारे सूत्र बताते है कि, दवाओं के भंडारण और बिक्री से संबंधित कोई भी वैध कागजात मौजूद बाबा के पास नहीं हैं। बताया जा रहा है कि इन दुकानों में रखी गई दवाइयां निम्न गुणवत्ता की हैं, जिनका सेवन मरीजों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
लाखों की कमाई, दो सहयोगी भी तैनात
अंधविश्वास के इस कारोबार से बाबा हर महीने लाखों रुपये की कमाई करता है। उसके साथ दो सहयोगी भी काम करते हैं, जिन्हें मामूली मेहनताना दिया जाता है। झाड़फूंक और दवाओं के नाम पर भोले-भाले लोगों से मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन न इलाज की गारंटी है और न जवाबदेही।
जानकारी अनुसार, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नगर के व्यस्त क्षेत्र में इतने वर्षों से चल रहे इस अवैध धंधे पर अब तक स्वास्थ्य विभाग ने न तो सीलिंग की कार्रवाई की न तो कोई ठोस कदम उठाया। क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है, या जानकारी होने के बावजूद अनदेखी की जा रही है? यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
CMHO का बयान
इस पूरे मामले को लेकर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर बसंत सिंह से चर्चा की गई, तो उन्होंने कहा कि, इस तरह झाड़फूंक और अवैध तरीके से इलाज करने वाले लोगों पर सख्ती से नकेल कसने की जरूरत है। मामला एसडीएम के संज्ञान में है और बहुत जल्द संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जनहित में हस्तक्षेप जरूरी
रामानुजगंज जैसे सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह का अंधविश्वास न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी चोट करता है। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहते हैं और कब इस ‘बाबा’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है।
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